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रायपुर

पत्रकार मनोज पाण्डेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: झूठे आरोपों पर मिली अग्रिम जमानत

पत्रकार मनोज पाण्डेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: झूठे आरोपों पर मिली अग्रिम जमानत

झूठे जातिगत अपशब्द मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से संचालित साप्ताहिक बुलंद छत्तीसगढ़ और दैनिक बुलंद मीडिया के संपादक मनोज पाण्डेय को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देकर बड़ी राहत प्रदान की है। यह मामला एक झूठे जातिगत अपशब्द के आरोप से जुड़ा है, जिसे लेकर मनोज पाण्डेय ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।पत्रकार मनोज पाण्डेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

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मामले का पृष्ठभूमि: क्यों लगा मनोज पाण्डेय पर आरोप?

  • भ्रष्टाचार उजागर करने की वजह से मामला दर्ज:
    मनोज पाण्डेय ने पिछले 10-15 वर्षों में विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा किए गए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं को अपने समाचार पत्र में उजागर किया।
  • अप्रैल 2023 की घटना का झूठा मामला:
    इस घटना को 7 माह बाद (अक्टूबर 2023) झूठे जातिगत अपशब्दों के आरोप के साथ दर्ज किया गया।
  • गैर-प्रासंगिक शिकायत:
    मामला अनुसूचित जाति/जनजाति के कर्मी के खिलाफ अपशब्द के आरोप से संबंधित था, लेकिन शिकायत एक सामान्य वर्ग के ठेकेदार द्वारा दर्ज कराई गई।

उच्च न्यायालय ने खारिज की थी याचिका

  • अगस्त 2024 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी।
  • कोर्ट ने कहा कि मनोज पाण्डेय के खिलाफ अन्य मामले भी दर्ज हैं, और संपादक के रूप में उनकी भूमिका संदिग्ध मानी गई।

सुप्रीम कोर्ट में अपील: मनोज पाण्डेय ने क्या कहा?

पत्रकार मनोज पाण्डेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: झूठे आरोपों पर मिली अग्रिम जमानत

  • सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने याचिका दाखिल की।
  • याचिका में कहा गया:
    • ईमानदार पत्रकारिता करने की वजह से मनोज पाण्डेय को झूठे आरोपों का सामना करना पड़ा।
    • मामला द्वेषपूर्ण इरादे से 7 महीने बाद दर्ज किया गया, ताकि पाण्डेय पर मानसिक दबाव बनाया जा सके।
    • यह प्रयास किया गया कि वे अनियमितताओं को उजागर करने से पीछे हट जाएं।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: अग्रिम जमानत की राहत

  • पहली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान की।
  • फाइनल सुनवाई में सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
    • मामला पत्रकार की ईमानदारी और जनहित में की गई रिपोर्टिंग का नतीजा है।
    • यह एफआईआर मनोज पाण्डेय को दबाव में लाने के लिए दर्ज की गई है।
  • कोर्ट ने मनोज पाण्डेय को पूर्ण अग्रिम जमानत प्रदान की।

ईमानदार पत्रकारिता पर हमले का मामला

  • यह मामला साफ करता है कि ईमानदार पत्रकारिता को दबाने के लिए झूठे मामलों का सहारा लिया जा रहा है।
  • कोर्ट का यह निर्णय पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सच्चाई के पक्ष में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

सच्चाई की जीत

मनोज पाण्डेय को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत यह दर्शाती है कि ईमानदारी और सच्चाई के खिलाफ साजिशें लंबे समय तक टिक नहीं सकतीं।
यह निर्णय उन सभी पत्रकारों के लिए प्रेरणा है जो समाज और शासन की अनियमितताओं को उजागर करने का साहस रखते हैं।

ईमानदारी से खबरों को उजागर करना ही सच्ची पत्रकारिता का आधार है, और यह फैसला सच्चाई के पक्ष में एक मजबूत कदम है।पत्रकार मनोज पाण्डेय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

 

Nidar Chhattisgarh Desk

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