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कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज, अब कमेटी करेगी 76 पदों की गहन जांच

दो साल से लंबित भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप, जिला प्रशासन का कड़ा रुख; तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

कोरबा : कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज, अब कमेटी करेगी 76 पदों की गहन जांच, छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग के चोटिया परियोजना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के 76 पदों पर निकली भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। दो साल से अधिक समय से लंबित इस भर्ती में अनियमितताओं के आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) रेणु प्रकाश ने एक तीन सदस्यीय जिला स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है, जिसे मात्र तीन दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। इस जांच के आदेश से परियोजना कार्यालय में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?

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दरअसल, लगभग दो वर्ष पूर्व महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा के एकीकृत बाल विकास परियोजना, चोटिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के कुल 76 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार था, लेकिन किन्हीं कारणों से यह प्रक्रिया लगातार लंबित रही। इस दौरान राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव भी संपन्न हुए और पोड़ी-उपरोड़ा जनपद पंचायत में नई टीम का गठन हुआ।कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज

हाल ही में जनपद पंचायत की पहली सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित थे। जनपद अध्यक्ष माधुरी तंवर की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष पूजा दुबे ने आंगनबाड़ी भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रभारी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल को तत्काल पद से हटाने और भर्ती में हुई कथित गड़बड़ी की गहन जांच कराने की मांग की।कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज

अनियमितताओं और लेनदेन के आरोप

जनपद अध्यक्ष माधुरी तंवर और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने भी इस मामले को बेहद गंभीर बताया। आरोपों के केंद्र में प्रभारी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल थे, जिन पर भर्ती प्रक्रिया में धांधली करने के आरोप लगाए गए। जनपद अध्यक्ष माधुरी तंवर ने इस संबंध में कलेक्टर अजीत वसंत को 11 बिंदुओं पर विस्तृत जांच की मांग करते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा। इन 11 बिंदुओं में न केवल भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का जिक्र था, बल्कि भर्ती के एवज में बड़े पैमाने पर “लेनदेन” यानी रिश्वतखोरी की भी शिकायत की गई थी।कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज

कलेक्टर का त्वरित संज्ञान और जांच के निर्देश

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया और जांच के आदेश जारी किए। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस मामले की गहनता से जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कलेक्टर के निर्देशों के बाद ही महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) रेणु प्रकाश ने जांच समिति का गठन किया।कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज

जांच समिति की संरचना और दायित्व

डीपीओ रेणु प्रकाश द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम में प्रमुख रूप से गजेन्द्र देव सिंह (जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, कोरबा), कीर्ति कुरियन जैन (परियोजना अधिकारी, एकीकृत बाल विकास परियोजना, बरपाली) और लक्ष्मीकांत यादव (सहायक ग्रेड-02, कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी-महिला एवं बाल विकास विभाग) शामिल हैं। इस समिति को तीन दिनों के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट डीपीओ को सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज

परियोजना अधिकारी का बचाव

वहीं, आरोपों से घिरे प्रभारी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल ने अपनी सफाई में कहा है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी मुख्य रूप से चुनाव के कारण हुई। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जिला स्तरीय जांच टीम द्वारा जांच पूरी होने के बाद ही वस्तुस्थिति स्पष्ट हो पाएगी।कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज

क्या होगा अगला कदम?

इस जांच के परिणाम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यदि जांच में अनियमितताओं और लेनदेन के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। यह मामला न केवल कोरबा जिले में बल्कि पूरे राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। जिला प्रशासन का यह कदम यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि यह जांच पीड़ित उम्मीदवारों को न्याय दिलाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगाएगी।कोरबा आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला: अधिकारी पर गाज

Dr. Tarachand Chandrakar

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