
Korba/Pali News: छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘जनदर्शन’ (Jan-Darshan) की शुरुआत इसलिए की थी ताकि आम जनता की समस्याओं का मौके पर निराकरण (Solution) हो सके। लेकिन कोरबा जिले के पाली विकासखंड में नजारा कुछ और ही है। यहां एक रिश्वतखोर पटवारी (Corrupt Patwari) के खिलाफ शिकायत किए हुए एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया है।
क्या है पूरा मामला? (The Corruption Scandal)
Korba News:मामला पाली ब्लॉक के ग्राम मांगामार का है। यहां के एक गरीब किसान छन्दराम धनवार ने कलेक्टर जनदर्शन में अपनी गुहार लगाई है। किसान का आरोप है कि हल्का पटवारी राजेन्द्र साहू जमीन के कागजात ऑनलाइन करने और पर्ची बनाने के बदले 15,000 रुपये की रिश्वत मांग रहा है।
Korba News:पीड़ित किसान ने बताया कि वह पहले ही 1,500 रुपये दे चुका है, लेकिन पटवारी का पेट नहीं भर रहा। इतना ही नहीं, किसान के भाइयों (मंगल और पहारू) से भी काम के बदले हजारों रुपये वसूले जा चुके हैं और अब 15-15 हजार की एक्स्ट्रा डिमांड की जा रही है।
“पैसे नहीं तो काम नहीं” – पटवारी के बुलंद हौसले
Korba News:किसान छन्दराम ने बताया कि वह एक दिहाड़ी मजदूर है और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। जब उसने रिश्वत देने में असमर्थता जताई, तो पटवारी ने जानबूझकर उसका काम अटका दिया। 23 मार्च को कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन देने के बावजूद, प्रशासन की तरफ से अब तक Investigation या Action की कोई खबर नहीं है। इससे शासन-प्रशासन की साख पर सवाल उठ रहे हैं।
सरपंचों ने भी खोला मोर्चा: “पटवारी की अपनी अलग रिश्वत लिस्ट है”
Korba News:इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अब गांव के जनप्रतिनिधि (Sarpanchs) भी सड़कों पर उतर आए हैं। मांगामार के सरपंच छत्रपाल सिंह राज और केराकछार सरपंच श्रीमती जीवन बाई कंवर ने SDM को ज्ञापन सौंपकर पटवारी राजेन्द्र साहू को हटाने की मांग की है।
सरपंचों का गंभीर आरोप:
Fixed Bribe Rates: नामांतरण (Mutation), बटांकन, और वन अधिकार पर्ची के लिए पटवारी ने 10 से 20 हजार रुपये का ‘रेट कार्ड’ फिक्स कर रखा है।
Signatures for Money: मृत्यु पंचनामा और वंशवृक्ष (Family Tree) पर साइन करने के लिए भी पैसों की डिमांड की जाती है।
Misbehavior: ग्रामीणों के साथ पटवारी का व्यवहार बिल्कुल भी सहयोगात्मक नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल (Public Trust at Stake)
Korba News: एक तरफ सरकार ‘सुशासन’ का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ फील्ड स्तर पर बैठे अधिकारी गरीब किसानों का शोषण कर रहे हैं। सरपंच संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषी पटवारी के खिलाफ Disciplinary Action नहीं लिया गया और उसका ट्रांसफर नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।



















