LPG Subsidy New Rules: साल 2025 घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़े बदलाव लेकर आ सकता है। केंद्र सरकार जल्द ही एलपीजी (LPG) सब्सिडी की गणना करने के पुराने फॉर्मूले को बदलने की तैयारी में है। अगर यह नया नियम लागू होता है, तो इसका सीधा असर गैस सिलेंडर की कीमतों और मिलने वाली सब्सिडी पर पड़ सकता है।
LPG Subsidy New Rules: हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियाँ अब सब्सिडी तय करने के लिए केवल मिडिल ईस्ट के देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। आइए जानते हैं कि आखिर सरकार क्या बदलाव करने जा रही है और क्या इससे आपकी रसोई का बजट बिगड़ जाएगा?
क्यों बदलने जा रहा है सब्सिडी कैलकुलेशन का तरीका?
LPG Subsidy New Rules: वर्तमान में भारत में एलपीजी सब्सिडी की गणना ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ (Saudi Contract Price) के आधार पर की जाती है। इसे मिडिल ईस्ट से आने वाली गैस के लिए वैश्विक बेंचमार्क माना जाता है। लेकिन अब स्थिति बदल रही है।
LPG Subsidy New Rules: भारतीय तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने हाल ही में अमेरिकी निर्यातकों के साथ लंबी अवधि के लिए गैस सप्लाई के समझौते किए हैं। अमेरिका से गैस मंगाने की शिपिंग लागत सऊदी अरब की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। ऐसे में तेल कंपनियों का तर्क है कि अब सब्सिडी के पुराने फॉर्मूले में अमेरिकी गैस की कीमत और उसकी भारी-भरकम शिपिंग कॉस्ट को भी शामिल किया जाना चाहिए।
क्या महंगा हो जाएगा रसोई गैस सिलेंडर?
LPG Subsidy New Rules: आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बदलाव से सिलेंडर के दाम बढ़ेंगे? इसके दो पहलू हैं:
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लागत का दबाव: अगर सरकार नए फॉर्मूले में महंगी शिपिंग लागत को जोड़ती है, तो गैस की लैंडिंग कॉस्ट (भारत पहुँचने की कीमत) बढ़ जाएगी। तकनीकी रूप से इससे कीमतें बढ़नी चाहिए।
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सरकार का ‘प्राइस कैप’ मॉडल: अच्छी खबर यह है कि सरकार अक्सर गैस की कीमतों पर एक ‘कैप’ (सीमा) लगाकर रखती है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ते हैं, तो सरकार कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई खुद करती है ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े।
LPG Subsidy New Rules: हालांकि, सब्सिडी के नए फॉर्मूले से यह तय होगा कि सरकार के खजाने पर कितना बोझ आएगा और भविष्य में कीमतों में कितनी स्थिरता रहेगी।
अमेरिका से बढ़ता आयात और रूस का फैक्टर
LPG Subsidy New Rules: भारत द्वारा गैस आयात के नियमों में बदलाव के पीछे गहरे भू-राजनीतिक कारण भी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका लगातार भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार:
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भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। अक्टूबर में यह 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया।
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भारतीय कंपनियों ने 2026 से अमेरिका से सालाना 22 लाख टन एलपीजी खरीदने का करार किया है, जो भारत की कुल जरूरत का करीब 10% है।
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यह पहली बार है जब भारत ने अमेरिका के साथ ‘स्पॉट मार्केट’ के बजाय लंबी अवधि का समझौता किया है।
LPG Subsidy New Rules: फिलहाल सरकार और तेल कंपनियों के बीच नए फॉर्मूले को लेकर चर्चा जारी है। यदि सरकार इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालती है, तो कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखी जा सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव और महंगाई को देखते हुए सरकार सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश करेगी।