छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार: एमए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन की रायपुर में विशाल पदयात्रा

छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार: एमए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन की रायपुर में विशाल पदयात्रा
रायपुर। अपनी माटी की भाषा, छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवीं अनुसूची में प्रतिष्ठित स्थान दिलाने तथा इसे पूर्ण राजभाषा का सम्मान प्रदान करने की पुरजोर मांग के साथ, एमए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन ने आज राजधानी रायपुर में एक विशाल पदयात्रा का आयोजन किया। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी भाषा की अस्मिता, उसके अधिकार और सम्मान के प्रति व्यापक जनजागरण करना है।छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार
1. छत्तीसगढ़ी अस्मिता की लड़ाई: प्रमुख मांगें और उद्देश्य
एमए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन का यह आंदोलन छत्तीसगढ़ी भाषा को उसका यथोचित सम्मान दिलाने पर केंद्रित है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिले 15 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, परंतु आज भी इसे व्यवहार में पूर्ण राजभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि छत्तीसगढ़ी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में तत्काल शामिल किया जाए, जिससे इसके विकास और संरक्षण का मार्ग प्रशस्त हो सके।छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार
2. पदयात्रा का मार्ग और समय: तेलीबांधा से प्रेस क्लब तक
छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति जनसमर्थन जुटाने और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह पदयात्रा आज सुबह 9 बजे रायपुर के ऐतिहासिक तेलीबांधा तालाब से प्रारंभ हुई। यह पदयात्रा शहर के हृदय स्थलों – घड़ी चौक और जयस्तंभ चौक – से गुजरते हुए रायपुर प्रेस क्लब पहुँचेगी। पदयात्रा का समापन प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के साथ होगा, जहाँ संगठन के पदाधिकारी अपनी मांगों को और विस्तार से रखेंगे।छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार
3. शिक्षा में छत्तीसगढ़ी की उपेक्षा पर आक्रोश: नई शिक्षा नीति का हवाला
एमए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष, ऋतुराज साहू ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्पष्ट रूप से मातृभाषा और स्थानीय बोलियों में शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान करती है। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा अब तक छत्तीसगढ़ी भाषा का व्यवस्थित पाठ्यक्रम तैयार नहीं किया गया है। उन्होंने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (SCERT) पर आरोप लगाया कि वह एक मिश्रित पाठ्यक्रम तैयार कर छत्तीसगढ़ी भाषा को दोयम दर्जे पर रखने का प्रयास कर रही है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना के सर्वथा विपरीत है।छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार
4. आगामी सत्र से अनिवार्य विषय बनाने की मांग
छात्र संगठन ने यह भी पुरजोर मांग की है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा को एक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाए। उनका मानना है कि इससे न केवल छात्र अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ेंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा का भी स्वाभाविक विकास होगा। इसी प्रमुख मांग को लेकर यह पदयात्रा आयोजित की गई है, ताकि शासन-प्रशासन इस गंभीर विषय पर तत्काल कार्रवाई करे।छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार
यह पदयात्रा न केवल एक भाषाई अधिकार की मांग है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है।छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने की हुंकार



















