MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill: मनरेगा की जगह अब ‘जी राम जी’ योजना, क्या ग्रामीण मजदूरों के अधिकार होंगे खत्म? जानें बड़े बदलाव

MGNREGA New Update: MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill: मनरेगा की जगह अब ‘जी राम जी’ योजना, क्या ग्रामीण मजदूरों के अधिकार होंगे खत्म? जानें बड़े बदलाव. केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार की दिशा में एक बड़ा और विवादित कदम उठाते हुए ‘मनरेगा’ (MGNREGA) को खत्म कर उसकी जगह ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM JI विधेयक, 2025 लाने का फैसला किया है। इस बदलाव ने न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञों के बीच भी एक नई बहस छेड़ दी है।
आइए जानते हैं कि इस नए विधेयक से ग्रामीण भारत और मजदूरों के जीवन पर क्या असर पड़ेगा।
1. नाम में बदलाव: महात्मा गांधी से ‘जी राम जी’ तक का सफर

MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill:विपक्ष और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने केवल योजना का नाम ही नहीं बदला, बल्कि इसके पीछे एक गहरी वैचारिक राजनीति छिपी है। महात्मा गांधी के नाम को हटाकर ‘जी राम जी’ नाम देना राजनीतिक ध्रुवीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का तर्क है कि यह “विकसित भारत 2047” के लक्ष्यों के अनुरूप है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह मनरेगा के मूल सिद्धांतों पर हमला है।
2. रोजगार की ‘यूनिवर्सल गारंटी’ पर संकट?
MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill:मनरेगा की सबसे बड़ी खूबी इसकी ‘मांग-आधारित’ प्रकृति थी, यानी कोई भी ग्रामीण परिवार जब काम मांगे, उसे 100 दिन का रोजगार देना सरकार की कानूनी बाध्यता थी।
नया नियम: नए विधेयक के तहत, अब रोजगार उन क्षेत्रों में उपलब्ध होगा जिन्हें केंद्र सरकार चुनेगी।
चिंता: इससे रोजगार की सार्वभौमिकता खत्म हो सकती है और फंड का आवंटन राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर होने का खतरा बढ़ जाएगा।
3. 125 दिनों का दावा: हकीकत या दिखावा?
MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill:सरकार ने नए विधेयक में रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का प्रावधान किया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि:
पिछले 11 वर्षों में मनरेगा के तहत औसतन केवल 40-45 दिन का ही काम मिल पाया है।
जॉब कार्डों को ‘युक्तियुक्त’ बनाने के नाम पर लाखों मजदूरों के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।
डिजिटल हाजिरी और आधार-लिंक्ड भुगतान जैसी अनिवार्यताओं ने ग्रामीण मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
4. राज्यों पर बढ़ा वित्तीय बोझ (फंडिंग पैटर्न में बदलाव)
MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill:अभी तक मनरेगा में मजदूरी का 100% खर्च केंद्र सरकार उठाती थी। नए विधेयक के अनुसार:
अब केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग का अनुपात 60:40 होगा।
बेरोजगारी भत्ता और मुआवजे का पूरा भार अब राज्यों पर डाल दिया गया है।
इससे पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए इस योजना को चला पाना कठिन होगा, जिसका सीधा नुकसान मजदूरों को होगा।
5. ‘कृषि सीजन’ में काम पर रोक: मजदूरों की बढ़ेगी निर्भरता
MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill:नए विधेयक का एक और विवादित हिस्सा यह है कि ‘कृषि-सघन मौसम’ के दौरान रोजगार योजना को निलंबित किया जा सकता है।
इसका मतलब है कि जब खेती का काम चल रहा होगा, तब सरकार मजदूरों को वैकल्पिक काम देने से मना कर सकती है।
इससे मजदूर पूरी तरह से बड़े भूस्वामियों के रहमो-करम पर निर्भर हो जाएंगे और उनकी मोलभाव (Bargaining) करने की शक्ति कम हो जाएगी।
6. न्यूनतम मजदूरी पर सवाल
MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill:जहां एक तरफ किसान संगठन और संसदीय समितियां प्रतिदिन ₹400 से ₹750 मजदूरी की मांग कर रही हैं, वहीं इस नए विधेयक में न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान मात्र ₹240 प्रतिदिन रखा गया है। यह कई राज्यों में चल रही वर्तमान मजदूरी दरों से भी कम है, जो ग्रामीण गरीबों के स्वाभिमान और आजीविका के साथ खिलवाड़ जैसा है।
MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill: क्या यह ग्रामीण विकास का नया मॉडल है?
MGNREGA vs VB-G RAM JI Bill:सरकार इसे “संरचनात्मक सुधार” कह रही है, जबकि आलोचक इसे “रोजगार का विनाश” मान रहे हैं। मनरेगा ने कोरोना काल जैसी आपदाओं में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभाला था। अब ‘जी राम जी’ विधेयक के माध्यम से केंद्र की जवाबदेही कम होना और राज्यों पर बोझ बढ़ना, ग्रामीण भारत के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
आलेख : संजय पराते
प्रमुख बदलाव एक नजर में:
| फीचर | पुराना मनरेगा (MGNREGA) | नया विधेयक (VB-G RAM JI) |
| रोजगार की प्रकृति | मांग-आधारित (Universal) | केंद्र द्वारा चयनित क्षेत्रों तक सीमित |
| कार्य दिवस | 100 दिन | 125 दिन (शर्तों के साथ) |
| फंडिंग (मजदूरी) | 100% केंद्र सरकार | 60% केंद्र : 40% राज्य |
| न्यूनतम मजदूरी | राज्यवार अलग | ₹240 प्रतिदिन (प्रस्तावित) |



















