नक्सल शांति वार्ता की पहल: नागरिक संगठनों की युद्धविराम और संवाद की अपील

✌️ नक्सल शांति वार्ता की पहल: नागरिक संगठनों की युद्धविराम और संवाद की अपील
? भाकपा (माओवादी) के शांति प्रस्ताव का स्वागत, नागरिक संगठनों की सरकार से बड़ी मांग
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी द्वारा सरकार को दिए गए शांति वार्ता के प्रस्ताव के बाद, देश के मानवाधिकार और नागरिक संगठनों ने एकजुट होकर सरकार और माओवादियों दोनों से युद्धविराम और संवाद की अपील की है।नक्सल शांति वार्ता की पहल
इन संगठनों ने एक खुला पत्र जारी कर कहा:
“हम भाकपा (माओवादी) के शांति वार्ता के प्रस्ताव और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वार्ता के लिए दरवाज़ा खुला रखने के बयान का स्वागत करते हैं। अब ज़रूरत है ज़मीनी स्तर पर हिंसा रोककर सकारात्मक कदम उठाने की।”नक्सल शांति वार्ता की पहल
⚖️ संविधान के दायरे में वार्ता की ज़रूरत
पत्र में साफ कहा गया है कि सरकार को माओवादी संघर्ष को विदेशी शत्रु से युद्ध की तरह नहीं, बल्कि अपने नागरिकों के साथ एक आंतरिक सामाजिक-राजनीतिक टकराव के रूप में देखना चाहिए। इसलिए:
- बिना शर्त वार्ता की शुरुआत की जाए
- आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए
- नए सशस्त्र कैंप और ऑपरेशनों को रोका जाए
? ऑपरेशन कगार से बढ़ी हिंसा, नागरिक बन रहे शिकार
संगठनों के पत्र में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए हैं:
- 2024-25 में 400+ मौतें, जिनमें कई नागरिक भी शामिल
- 2018-2022 के बीच नागरिकों की मौतें (335), सुरक्षा बलों (168) और माओवादियों (327) से अधिक
- ऑपरेशन कगार के तहत माओवादियों की हत्या पर ₹8.24 करोड़ का इनाम
“जिन्हें माओवादी बताया गया है, उनमें से कई ग्रामीणों ने उन्हें नागरिक के रूप में पहचाना है – यह दर्शाता है कि आम लोग हिंसा का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं।”नक्सल शांति वार्ता की पहल
?️ बस्तर में सैन्यीकरण पर चिंता, विकास पिछड़ रहा
पत्र में यह सवाल उठाया गया कि:
- सड़क और खनन परियोजनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन
- स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और कल्याणकारी योजनाएं पीछे छूट रही हैं
- खनन समझौतों के कारण विस्थापन और पर्यावरणीय क्षरण का खतरा बढ़ रहा है
- आदिवासियों की आवाज़ को दबाया जा रहा है, यहां तक कि विरोध करने पर जेल भेजा जा रहा है
? माओवादियों से भी की गई ये अहम अपील
- हिंसा और आईईडी हमलों पर रोक लगाएं
- जन अदालतों में मौत की सज़ा बंद करें
- ग्रामीणों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें
? स्वतंत्र पहुंच और न्यायपूर्ण प्रक्रिया की मांग
नागरिक संगठनों ने यह भी कहा:
- प्रभावित क्षेत्रों तक स्वतंत्र मीडिया और संगठनों को पहुंच दी जाए
- राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आदिवासियों की रिहाई हो
- लोकतांत्रिक असहमति को कुचला न जाए
- सभी राजनीतिक ताकतें शांति प्रक्रिया का समर्थन करें
✊ संविधान के भीतर न्यायपूर्ण समाधान ही शांति की कुंजी
पत्र का अंतिम संदेश बेहद स्पष्ट है:
“हिंसा का अंत, न्याय की शुरुआत है। हम चाहते हैं कि सरकार और माओवादी दोनों संविधान के दायरे में न्याय और शांति का रास्ता अपनाएं।”नक्सल शांति वार्ता की पहल



















