New Labour Codes: नौकरी जाने के ‘दर्द’ पर मरहम! अब मुआवजे के साथ मिलेगा ‘री-स्किलिंग फंड’, जानिए क्या है नया नियम
21 नवंबर 2025 से प्रभावी: छंटनी होने पर कंपनियों को 45 दिनों के भीतर देना होगा 15 दिन का अतिरिक्त वेतन, ताकि नई स्किल सीख सकें कर्मचारी।

नई दिल्ली
केंद्र सरकार के नए लेबर कोड (New Labour Codes) 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गए हैं। अक्सर चर्चा कर्मचारियों की सैलरी, पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी के इर्द-गिर्द होती है, लेकिन इन नए नियमों में एक ऐसा प्रावधान भी छिपा है जो नौकरी जाने के सबसे मुश्किल वक्त में कर्मचारियों के लिए बड़ा सहारा बनेगा। नए ‘इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020’ के तहत अब अगर किसी कर्मचारी की छंटनी (Retrenchment) होती है, तो उसे केवल पुराना मुआवजा नहीं, बल्कि एक नया ‘री-स्किलिंग फंड’ (Re-skilling Fund) भी मिलेगा।
अब मिलेंगे दो तरह के लाभ
नए नियमों के मुताबिक, छंटनी का शिकार हुए कर्मचारी को अब कंपनी की तरफ से दो वित्तीय लाभ दिए जाएंगे:
छंटनी मुआवजा (Retrenchment Compensation): यह वह राशि है जो पुराने नियमों के तहत मिलती आ रही थी (सेवा के हर वर्ष के लिए 15 दिन का औसत वेतन)।
री-स्किलिंग फंड (Re-skilling Fund): यह पूरी तरह से नया प्रावधान है। यह अतिरिक्त पैसा कर्मचारी को नई स्किल (कौशल) सीखने में मदद करेगा, ताकि वह जल्द दूसरी नौकरी पा सके।
क्या है ‘री-स्किलिंग फंड’ और कितना मिलेगा पैसा?
सरकार ने ऑटोमेशन और बदलती तकनीक को देखते हुए यह माना है कि नौकरी जाने पर कर्मचारी को नई चीजें सीखने की जरूरत होती है।
कितना पैसा: जिस कर्मचारी को निकाला गया है, कंपनी को उसकी आखिरी सैलरी के 15 दिनों के बराबर की राशि इस फंड में देनी होगी।
कब मिलेगा: छंटनी होने के 45 दिनों के भीतर यह राशि सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जमा करनी होगी।
कौन देगा: यह पैसा पूरी तरह से कंपनी या औद्योगिक संस्थान को देना होगा।
एक्सपर्ट्स की राय: यह मुआवजे से अलग है
ईटी वेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, एसकेवी लॉ ऑफिसेज के सीनियर पार्टनर प्रणव भास्कर बताते हैं कि री-स्किलिंग फंड, पुराने छंटनी मुआवजे का हिस्सा नहीं है, बल्कि उससे बिल्कुल अलग है।
वहीं, सिरिल अमरचंद मंगलदास की पार्टनर अंकिता रे स्पष्ट करती हैं, “नियोक्ताओं (कंपनियों) पर अब दोहरी जिम्मेदारी है। उन्हें सर्विस के हर साल के बदले 15 दिन का औसत वेतन (मुआवजा) तो देना ही है, साथ ही आखिरी सैलरी के आधार पर 15 दिन का अतिरिक्त पैसा री-स्किलिंग फंड के तौर पर 45 दिन के भीतर देना होगा।”नौकरी जाने के ‘दर्द’ पर मरहम! अब मुआवजे के साथ मिलेगा ‘री-स्किलिंग फंड’, जानिए क्या है नया नियम
कब मानी जाएगी ‘छंटनी’?
अक्सर लोग नौकरी छूटने के हर मामले को छंटनी समझ लेते हैं, लेकिन कानूनन ऐसा नहीं है।नौकरी जाने के ‘दर्द’ पर मरहम! अब मुआवजे के साथ मिलेगा ‘री-स्किलिंग फंड’, जानिए क्या है नया नियम
यह छंटनी है: अगर कंपनी लागत कम करने (Cost cutting), रीस्ट्रक्चरिंग, नई टेक्नोलॉजी लाने या डिपार्टमेंट छोटा करने के लिए किसी को निकालती है। यह कर्मचारी के खराब प्रदर्शन या गलती की सजा नहीं होती।
यह छंटनी नहीं है: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS), कॉन्ट्रैक्ट खत्म होना, खराब स्वास्थ्य के कारण नौकरी जाना या अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary action) के तहत निकाला जाना।
क्यों पड़ा इस फंड का नाम ‘री-स्किलिंग’?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फंड ट्रांजिशन पीरियड (एक नौकरी से दूसरी नौकरी के बीच का समय) में वित्तीय मदद करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी की वजह से कर्मचारी मजबूरी में कोई भी काम न करे, बल्कि इस पैसे का उपयोग खुद को अपग्रेड करने में करे और बेहतर अवसर तलाश सके।नौकरी जाने के ‘दर्द’ पर मरहम! अब मुआवजे के साथ मिलेगा ‘री-स्किलिंग फंड’, जानिए क्या है नया नियम



















