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अमेरिका के वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार

माइक्रो RNA की खोज पर मिला सम्मान

स्टॉकहोम न्यूज: नोबेल पुरस्कार की घोषणा की प्रक्रिया 7 अक्टूबर को शुरू हो गई है। इस वर्ष मेडिसिन या फिजियोलॉजी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार माइक्रो RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड) की खोज के लिए सम्मानित किया गया है। यह खोज मानव शरीर में कोशिकाओं के विकास और कार्यप्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण है। दोनों वैज्ञानिकों ने 1993 में माइक्रो RNA की खोज की थी, जो मानव जीनोम का एक अहम हिस्सा है। अमेरिका के वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार

माइक्रो RNA का महत्व

माइक्रो RNA, जो मूल RNA का एक हिस्सा होता है, पिछले 50 करोड़ वर्षों से बहुकोशिकीय जीवों के जीनोम में विकसित हुआ है। अब तक मानव में विभिन्न प्रकार के माइक्रो RNA के एक हजार से अधिक जीन की पहचान हो चुकी है। यह खोज चिकित्सा और बायोटेक्नोलॉजी में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है। अमेरिका के वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार

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गैरी रुवकुन को फोन पर मिली जानकारी

जब गैरी रुवकुन को नोबेल पुरस्कार की सूचना देने के लिए फोन किया गया, तब वे गहरी नींद में थे। नोबेल कमेटी ने उन्हें नींद से जगाकर इस महत्वपूर्ण सूचना दी। 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक विज्ञान, अर्थशास्त्र, साहित्य और शांति जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार स्वीडन के स्टॉकहोम में प्रदान किया जाएगा और इसकी राशि 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर यानी लगभग 8.90 करोड़ रुपए है। अमेरिका के वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार

नोबेल पुरस्कार का इतिहास

नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी, और तब से 2024 तक मेडिसिन के क्षेत्र में 229 व्यक्तियों को इस सम्मान से नवाजा जा चुका है। पिछली बार मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार कैटलिन कारिको और ड्रू वीसमैन को मिला था। नोबेल कमेटी ने उल्लेख किया था कि इनकी दी गई mRNA तकनीक के आधार पर विकसित कोरोना वैक्सीन ने वैश्विक महामारी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह पहली बार था जब mRNA तकनीक पर आधारित वैक्सीन विकसित की गई थी, जिसे फाइजर, बायोएनटेक और मॉडर्ना ने बनाया था। अमेरिका के वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार

Nidar Chhattisgarh Desk

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