Patna High Court News: Patna High Court on Minor Arrest: बिहार पुलिस की एक बड़ी लापरवाही पर पटना हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक 16 साल के नाबालिग छात्र (Minor Student) को बिना किसी ठोस सबूत के गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले में कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस रितेश कुमार की बेंच ने इस कार्रवाई को “Illegal and Arbitrary” करार देते हुए पीड़ित को ₹5 लाख का मुआवजा देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
“हम मूक दर्शक बनकर नहीं बैठ सकते” – High Court
Patna High Court on Minor Arrest: सुनवाई के दौरान पटना हाई कोर्ट ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। बेंच ने कहा कि कोर्ट पुलिस की इस “गैर-कानूनी” (Unlawful) हरकत पर Silent Spectator नहीं बना रह सकता। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि यह याचिकाकर्ता की Illegal Arrest का मामला है और एक संवैधानिक कोर्ट होने के नाते नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।
Key Highlights of the Case:
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Victim’s Age: घटना के वक्त छात्र की उम्र मात्र 15 साल, 6 महीने और 8 दिन थी।
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Illegal Detention: नाबालिग को पिछले साल 23 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और वह ढाई महीने से ज्यादा समय तक जेल में रहा।
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Police Negligence: जांच अधिकारी (IO) ने नाबालिग को 19 साल का बताकर कोर्ट में पेश किया।
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Court Order: बिहार सरकार को ₹5 लाख का मुआवजा (Compensation) देने का आदेश।
मजिस्ट्रेट को भी लगी फटकार (Magistrate Slammed)
Patna High Court on Minor Arrest: सिर्फ पुलिस ही नहीं, हाई कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने मामले के पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया और सीधे नाबालिग को जेल भेज दिया। बेंच के अनुसार, मजिस्ट्रेट याचिकाकर्ता को उसकी “अवैध गिरफ्तारी” से बचाने में पूरी तरह विफल रहे।
दोषी अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाएगा पैसा!
Patna High Court on Minor Arrest: Patna High Court ने एक बहुत ही कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि ₹5 लाख की यह राशि भले ही राज्य सरकार दे, लेकिन इसे “Doshi Officers” (Guilty Officers) की जेब से वसूला जाना चाहिए। कोर्ट ने बिहार के DGP (Director General of Police) को निर्देश दिया है कि वे इस मामले की प्रशासनिक जांच करें और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
क्या था पूरा मामला? (Background of the Incident)
Patna High Court on Minor Arrest: यह मामला बिहार के मधेपुरा (Madhepura) जिले का है। एक गांव में दो गुटों के बीच मारपीट हुई थी, जिसके बाद BNS (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। नाबालिग छात्र का नाम भी आरोपियों में शामिल था।
Patna High Court on Minor Arrest: हैरानी की बात यह है कि रिकॉर्ड के अनुसार, जांच अधिकारी के पास उस लड़के के खिलाफ कोई ठोस सबूत (No Concrete Evidence) नहीं था। इसके बावजूद, उसे गिरफ्तार कर बालिग दिखाया गया और जेल भेज दिया गया। एडवोकेट शाश्वत कुमार और अमन आलम ने नाबालिग की ओर से Habeas Corpus (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की थी, जिस पर यह बड़ा फैसला आया है।