
Raipur News: आंबेडकर अस्पताल में 22 करोड़ की मशीनें 9 साल से बंद, कैंसर मरीजों को भुगतनी पड़ रही कीमत
? पेट-सीटी और गामा कैमरा मशीनें बनीं शोपीस, निजी अस्पतालों की लूट जारी
रायपुर। Raipur News: आंबेडकर अस्पताल में 22 करोड़ की मशीनें 9 साल से बंद, कैंसर मरीजों को भुगतनी पड़ रही कीमत, राजधानी के आंबेडकर अस्पताल में करीब 22 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित की गई पेट सीटी स्कैन और गामा कैमरा मशीनें बीते नौ वर्षों से बंद पड़ी हैं। इन मशीनों को 2016-17 में स्थापित किया गया था, लेकिन आज तक इन्हें नियमित रूप से शुरू नहीं किया गया है। इस लापरवाही का खामियाजा आज भी कैंसर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
? सरकारी मशीन बंद, निजी अस्पतालों में 25 हजार तक चुकाने मजबूर मरीज
मरीजों को मजबूरी में निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स में जाकर 22 से 25 हजार रुपए तक खर्च कर जांच करवानी पड़ रही है। वहीं, एम्स रायपुर में सस्ती जांच संभव है लेकिन 40 दिन तक की वेटिंग होने के कारण वहां पहुंच पाना कठिन हो जाता है।Raipur News: आंबेडकर अस्पताल में 22 करोड़ की मशीनें 9 साल से बंद, कैंसर मरीजों को भुगतनी पड़ रही कीमत
⚙️ इंस्टालेशन के बाद भी मशीनें नहीं हुईं शुरू, बदल चुकी हैं दो सरकारें
इन मशीनों को 2018 में इंस्टॉल कर दिया गया था और मुंबई की एक एजेंसी को संचालन के लिए तय भी कर दिया गया था। लेकिन सरकार बदलते ही कांग्रेस ने मशीन की खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यह खरीद प्रशासनिक स्वीकृति के बिना की गई थी।Raipur News: आंबेडकर अस्पताल में 22 करोड़ की मशीनें 9 साल से बंद, कैंसर मरीजों को भुगतनी पड़ रही कीमत
इस विवाद के चलते मशीनें कभी शुरू ही नहीं हो पाईं, जबकि 90 प्रतिशत भुगतान सप्लायर को पहले ही कर दिया गया था।
?️ मशीनें तकनीकी रूप से चालू, लेकिन फाइलें शासन में अटकीं
डॉक्टरों के अनुसार, दोनों मशीनें तकनीकी रूप से चालू हालत में हैं, लेकिन शासन स्तर से हरी झंडी नहीं मिल रही।
डॉ. विवेक चौधरी, डीन नेहरू मेडिकल कॉलेज ने बताया, “हमारी ओर से सारी तैयारी पूरी है, निर्णय शासन को लेना है।“
एम्स के पीआरओ डॉ. मृत्युंजय राठौर ने बताया कि एम्स में मरीजों की संख्या अधिक और फैकल्टी कम होने से पेट सीटी जांच में लंबी वेटिंग रहती है।Raipur News: आंबेडकर अस्पताल में 22 करोड़ की मशीनें 9 साल से बंद, कैंसर मरीजों को भुगतनी पड़ रही कीमत
⚠️ वारंटी खत्म, जरूरी पुर्जे खराब, फिर भी शासन का रुख सुस्त
इन मशीनों की वारंटी अवधि 2023 में समाप्त हो चुकी है, और अब इनमें से कुछ डिस्पोजेबल पार्ट्स खराब हो चुके हैं, जिन्हें हर चार साल में बदला जाना चाहिए। बाकी हिस्से अभी भी काम करने लायक हैं। इसके बावजूद शासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं हो रही।Raipur News: आंबेडकर अस्पताल में 22 करोड़ की मशीनें 9 साल से बंद, कैंसर मरीजों को भुगतनी पड़ रही कीमत
?️ स्वास्थ्य मंत्री का अल्टीमेटम भी बेअसर
दिसंबर 2023 में सत्ता में लौटने के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने अस्पताल निरीक्षण के दौरान इन बंद मशीनों को देखकर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने तत्कालीन बैठक में तीन माह का समय देकर मशीनें चालू करने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।Raipur News: आंबेडकर अस्पताल में 22 करोड़ की मशीनें 9 साल से बंद, कैंसर मरीजों को भुगतनी पड़ रही कीमत



















