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बीमा कंपनी को भारी पड़ा क्लेम खारिज करना, अब वाहन मालिक को देने होंगे 17.25 लाख रुपये

जिला उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: चोरी हुए डंफर का क्लेम देने में आनाकानी करने पर कंपनी पर लगा जुर्माना, 45 दिनों के भीतर ब्याज समेत करनी होगी भरपाई

छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश): बीमा कंपनी को भारी पड़ा क्लेम खारिज करना, अब वाहन मालिक को देने होंगे 17.25 लाख रुपये. वाहन चोरी होने के बाद बीमा क्लेम (Insurance Claim) देने में आनाकानी करना एक बीमा कंपनी को महंगा पड़ गया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, छिंदवाड़ा ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए बीमा कंपनी को ‘सेवा में कमी’ का दोषी पाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह डंफर मालिक को 17 लाख 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करे।

क्या है पूरा मामला?
परिवादी दीपक भोयर ने वर्ष 2019 में करीब 31.50 लाख रुपये में एक डंफर खरीदा था। वाहन का बीमा 8 अप्रैल 2022 से 7 अप्रैल 2023 तक वैध था। परिवादी के अनुसार, 19 मई 2022 की रात को उनका डंफर ग्राम झंडा रिंग रोड स्थित नितेश बेलबंशी के प्लॉट से चोरी हो गया। वाहन के साथ उसमें रखे आरसी, इंश्योरेंस की कॉपी, परमिट और फिटनेस जैसे जरूरी दस्तावेज भी चोरी हो गए थे।बीमा कंपनी को भारी पड़ा क्लेम खारिज करना

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घटना के बाद परिवादी ने 31 मई 2022 को पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर देहात पुलिस ने चोरी का प्रकरण दर्ज किया। इसके बाद जब वाहन मालिक ने बीमा कंपनी से क्षतिपूर्ति की मांग की, तो कंपनी ने सूचना देने में ‘विलंब’ (Dealy in intimation) का हवाला देते हुए क्लेम देने से साफ इनकार कर दिया।बीमा कंपनी को भारी पड़ा क्लेम खारिज करना

कोर्ट ने कंपनी की दलील को किया खारिज
बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज किए जाने के बाद, पीड़ित ने दिसंबर 2024 में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, छिंदवाड़ा का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी के अधिवक्ता अजय पालीवाल ने अपना पक्ष रखा।बीमा कंपनी को भारी पड़ा क्लेम खारिज करना

आयोग के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार सोनकर, सदस्य मोहन सोनी एवं सदस्य नीता मालवीय की बेंच ने मामले की गंभीरता से सुनवाई की। बेंच ने पाया कि वाहन चोरी होने के बावजूद तकनीकी कारणों का हवाला देकर क्लेम न देना बीमा कंपनी की ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) है।बीमा कंपनी को भारी पड़ा क्लेम खारिज करना

आयोग का आदेश: ब्याज और हर्जाना भी देना होगा
20 नवंबर 2025 को पारित निर्णय में आयोग ने बीमा कंपनी को सख्त निर्देश दिए हैं:

  1. क्षतिपूर्ति राशि: कंपनी को 45 दिनों के भीतर परिवादी को 17,25,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

  2. मानसिक प्रताड़ना: सेवा में कमी और मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपये अलग से देने होंगे।

  3. वाद व्यय: कानूनी खर्च के रूप में 2,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

  4. ब्याज: यदि कंपनी 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करती है, तो आवेदन दिनांक से भुगतान की तिथि तक पूरी राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

यह फैसला उन वाहन मालिकों के लिए एक राहत की खबर है, जिनके क्लेम बीमा कंपनियां अक्सर तकनीकी पेंच फंसाकर रोक देती हैं।बीमा कंपनी को भारी पड़ा क्लेम खारिज करना


Dr. Tarachand Chandrakar

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