पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय रक्षा शेयरों में ‘रॉकेट’ जैसी तेजी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर: डिफेंस सेक्टर में लौटी रौनक
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय रक्षा शेयरों में ‘रॉकेट’ जैसी तेजी, दुनिया भर की नजरें फिलहाल पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे संघर्ष पर टिकी हैं। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को घरेलू बाजार में रक्षा क्षेत्र (Defense Sector) की कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी का माहौल रहा, जिससे कई प्रमुख स्टॉक्स ने 7 फीसदी तक की छलांग लगाई।
लगातार दूसरे दिन रक्षा शेयरों का दबदबा
रक्षा कंपनियों के शेयरों में तेजी का यह सिलसिला लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में जारी रहा। वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों ने डिफेंस पोर्टफोलियो पर भरोसा जताया है। इस सेक्टर के दिग्गज शेयरों में भारी लिवाली (Buying) होने से बाजार का माहौल सकारात्मक बना हुआ है।
इन शेयरों ने मारी बाजी: Mazagon Dock और GRSE में भारी उछाल
इस तेजी के बीच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल देखी गई।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स: इस कंपनी के शेयरों में लगभग 6.92% की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। गौरतलब है कि करीब 9 महीनों के अंतराल के बाद इस शेयर में इतनी बड़ी एकदिवसीय तेजी आई है।
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE): इसके शेयरों में भी निवेशकों ने खूब दिलचस्पी दिखाई और यह करीब 6.14% ऊपर चढ़कर बंद हुआ।
निफ्टी डिफेंस इंडेक्स का शानदार प्रदर्शन
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय रक्षा शेयरों में ‘रॉकेट’ जैसी तेजीभारतीय बाजार में रक्षा क्षेत्र की गतिविधियों को दर्शाने वाला निफ्टी डिफेंस इंडेक्स (Nifty Defense Index) शुक्रवार को 3% से ज्यादा की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। इससे पिछले सत्र में भी इस इंडेक्स ने 2.5% की बढ़त बनाई थी। इंडेक्स की 18 कंपनियों में से 17 कंपनियां हरे निशान (Green Zone) में रहीं, जो रक्षा क्षेत्र के प्रति निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाती हैं।
सरकारी प्रोत्साहन और आत्मनिर्भर भारत का असर
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय रक्षा शेयरों में ‘रॉकेट’ जैसी तेजीरक्षा क्षेत्र की इस मजबूती के पीछे केवल वैश्विक कारण ही नहीं, बल्कि सरकार का समर्थन भी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE) जैसे संस्थानों की महत्ता पर जोर दिया था। सरकार का लक्ष्य देश के औद्योगिक ढांचे को इतना मजबूत बनाना है कि वह भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहे।
युद्ध की स्थिति में क्यों बढ़ते हैं रक्षा शेयर?
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय रक्षा शेयरों में ‘रॉकेट’ जैसी तेजीबाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी पश्चिम एशिया जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो देशों का ध्यान अपनी रक्षा तैयारियों और सैन्य ताकत बढ़ाने पर केंद्रित हो जाता है। ऐसी स्थिति में:
मिसाइल और डिफेंस सिस्टम की मांग बढ़ती है।
निगरानी उपकरण, ड्रोन और रडार की जरूरत महसूस होती है।
गोला-बारूद और आधुनिक हथियारों के नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
पश्चिम एशिया संकट के बीच भारतीय रक्षा शेयरों में ‘रॉकेट’ जैसी तेजीअगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक खिंचता है, तो रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर मिल सकते हैं। यही कारण है कि निवेशक लंबी अवधि के मुनाफे को देखते हुए डिफेंस स्टॉक्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए ही निवेश का निर्णय लें।



















