सीएमएचओ ने आरटीआई में नही दी जानकारी, अब गिरफ्तारी वारंट जारी
- RTI Against Corruption : मध्यप्रदेश में इस तरह का पहला मामला : जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह
- आरटीआई आवेदन में सूचना देने से मना करने पर कोर्ट ने दिया 4 अफसरों पर एफआईआर का आदेश
- प्रदेश के इतिहास में यह पहला मामला है, जब सूचना आयुक्त ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दो साल पहले हरियाणा में ऐसा ही एक मामला सामने आ चुका है।
NCG News desk Bhopal:-
भोपाल। आरटीआइ कानून के तहत मांगी गई जानकारी तीन साल तक नहीं देने एवं आवेदक को सालो तक गुमराह करने के मामले में मध्यप्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बुरहानपुर के तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. विक्रम सिंह (CHMO Dr. Vikrant Singh) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट (Arrest Warant) जारी किया है। पांच हजार रुपए का जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए इंदौर डीआइजी को वारंट तामीली के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी को नोटिस जारी किया है। उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए समन भी जारी किया है। बता दें कि प्रदेश के इतिहास में यह पहला मामला है, जब सूचना आयुक्त ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। दो साल पहले हरियाणा में ऐसा ही एक मामला सामने आ चुका है।जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह
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आयोग के वारंट की तामील करा कर दोषी अधिकारी डॉ. सिंह को गिरफ्तार कर आयोग के समक्ष 11 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे हाजिर करने कहा गया है। आयोग ने वारंट में यह भी कहा है कि अगर डॉ. सिंह पांच हजार की जमानत देकर खुद आयोग के समक्ष 11 अक्टूबर की पेशी में हाजिर होने तैयार हैं तो उनसे जमानत की राशि लेकर उन्हें आयोग के समक्ष हाजिर होने के लिए रिहा कर दिया जाए।जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह
लगातार समान भेजने पर भी नही हुए उपस्थित
आयोग ने डॉ. विक्रम सिंह अपना जवाब पेश करने के लिए 18 अक्टूबर 2019 से 10 फरवरी 2020 तक लगातार 5 समन जारी किए। इसके बाद भी वे हाजिर नहीं हुए। आयोग ने उपस्थिति सुनिश्चित करने स्वास्थ्य संचालनालय के कमिश्नर को भी निर्देश दिए।जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह
इसके बाद 16 दिसंबर 2020 को इस प्रकरण में 25 हजार का जुर्माना लगाया। साथ ही आयुक्त स्वास्थ संचनालय को 1 महीने में पैनल्टी की राशि जमा ना होने पर डॉ. सिंह के वेतन से काटकर आयोग में जमा करने के निर्देश दिए, लेकिन न तो राशि जमा हुई और न ही वे आयोग के समक्ष हाजिर हुए।जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह
कितने दिनों में है जानकारी देने का नियम?
राज्य सूचना आयुक्त के अनुसार आरटीआई एक्ट की धारा 7 (1) के तहत अगर 30 दिन में जानकारी नहीं मिलती है तो धारा 20 के तहत 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाता है। दोषी अधिकारी को एक महीने का समय जुर्माने की राशि आयोग में जमा करने के लिए दिया जाता है।
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इसके बाद आयोग दोषी अधिकारी के कंट्रोलिंग अधिकारी को जुर्माने की राशि वसूलने और दोषी अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट करता है। सिविल कोर्ट की शक्तियों का भी उपयोग करता है।जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह
30 दिन में जानकारी देना अनिवार्य
आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत आवेदन करने के 30 दिन अंदर आवेदक को जानकारी देना अनिवार्य है। यदि जानकारी देने योग्य नहीं है तो ठोस कारण बताया जाए। आवेदक यदि संतुष्ट नहीं होता है तो वह प्रथम अपील या शिकायत कर सकता है। इस मामले में तीन साल तक जानकारी नहीं दी गई। अभी प्रदेश में 6000 से अधिक मामले आयोग के पास पेंडिंग हैं।जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह

राज्य सूचना आयुक्त की तल्ख टिप्पणी
राज्य सूचना आयुक्त ने मामले पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों अधिकारियों का व्यवहार संसद द्वारा स्थापित पारदर्शी और जवाबदेह सुशासन सुनिश्चित करने वाले आरटीआई कानून का मखौल उड़ाने वाला है। आयोग इस तरह आरटीआई एक्ट के खुलेआम उल्लंघन को मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकता। जनसूचना अधिकारी तीन साल तक आवेदक को करते रहे गुमराह.
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