Share Market Crash: विदेशी निवेशकों की महा-बिकवाली, टूटने वाला है ऑल-टाइम रिकॉर्ड; जानें सेंसेक्स में गिरावट की बड़ी वजह

Market Update: Share Market Crash: विदेशी निवेशकों की महा-बिकवाली, टूटने वाला है ऑल-टाइम रिकॉर्ड; जानें सेंसेक्स में गिरावट की बड़ी वजह, भारतीय शेयर बाजार के लिए मार्च 2026 का महीना अब तक के सबसे कठिन दौर में से एक साबित हो रहा है। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस अनिश्चितता के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर फंड निकालना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट देखी जा रही है।
FPI बिकवाली: टूटने वाला है अक्टूबर 2024 का रिकॉर्ड
Share Market Crash:विदेशी निवेशकों की बिकवाली अब एक नए ऐतिहासिक स्तर को छूने के करीब है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस महीने अब तक FPI भारतीय बाजार से ₹93,698 करोड़ की निकासी कर चुके हैं। यह आंकड़ा अक्टूबर 2024 के ₹94,017 करोड़ के रिकॉर्ड आउटफ्लो से महज ₹500 करोड़ दूर है। बाजार के जानकारों का मानना है कि जिस रफ्तार से बिकवाली हो रही है, यह रिकॉर्ड अगले एक-दो ट्रेडिंग सत्रों में ही ध्वस्त हो सकता है।
सेंसेक्स और निफ्टी पर ‘जियोपॉलिटिकल’ संकट का साया
Share Market Crash:मार्च के महीने में अब तक सेंसेक्स करीब 6,750 अंक यानी 8.3% तक टूट चुका है। इस भारी गिरावट के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि चुनौतियों की एक लंबी सूची है:
वैश्विक युद्ध: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सीधे तौर पर बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहा है।
क्रूड ऑयल की कीमतें: युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल के दामों में उछाल ने महंगाई का डर बढ़ा दिया है।
डॉलर की मजबूती: वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपया अपने निचले स्तरों पर पहुंच गया है।
केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं, जिससे बाजार से तरलता (Liquidity) कम हो रही है।
FPI बनाम DII: बाजार को बचाने की जंग
Share Market Crash:बाजार में इस समय विदेशी निवेशकों (FPI) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के बीच रस्साकशी चल रही है। जहाँ एक तरफ विदेशी निवेशक रोजाना औसतन ₹7,000 करोड़ के शेयर बेच रहे हैं, वहीं भारतीय संस्थागत निवेशक और रिटेल निवेशक बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को भारी बिकवाली के बावजूद सेंसेक्स में जो 326 अंकों की मामूली रिकवरी दिखी, वह घरेलू निवेशकों की खरीदारी का ही नतीजा थी। हालांकि, उच्च वोलैटिलिटी (High Volatility) के कारण बाजार अभी भी किसी ठोस दिशा में बढ़ता नहीं दिख रहा है।
क्या है निफ्टी और सेंसेक्स का अगला स्तर?
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार पर दबाव बना रहेगा। जानकारों का कहना है कि यदि निफ्टी 22,900 के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ता है, तो यह 22,500 के स्तर तक फिसल सकता है।
Share Market Crash:वैश्विक बाजारों की बात करें तो अमेरिका के डाओ जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भी गिरावट का सिलसिला जारी है। यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी बाजार भी पिछले कई महीनों के निचले स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार में वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उच्च गुणवत्ता वाले (Blue-chip) शेयरों पर नजर रखें और बाजार में स्थिरता आने का इंतजार करें।



















