Share Market Crash: शेयर बाजार में मची भारी तबाही, सेंसेक्स 800 अंक टूटा; निवेशकों के करोड़ों डूबे, जानें गिरावट की बड़ी वजहें

स्टॉक मार्केट अपडेट: Share Market Crash: शेयर बाजार में मची भारी तबाही, सेंसेक्स 800 अंक टूटा; निवेशकों के करोड़ों डूबे, जानें गिरावट की बड़ी वजहें, भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘ब्लैक डे’ साबित हो रहा है। वैश्विक बाजारों (Global Markets) से मिल रहे खराब संकेतों और अमेरिकी बाजार में मची अफरातफरी के कारण भारतीय निवेशकों के बीच डर का माहौल है। लगातार दूसरे दिन बाजार में जोरदार बिकवाली देखी जा रही है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गए हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी में हाहाकार: प्रमुख आंकड़ों पर एक नजर
Share Market Crash: कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक टूट गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 25,600 के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ते हुए नीचे आ गया। दलाल स्ट्रीट पर छाई इस लाली ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को तगड़ा झटका दिया है। बाजार में चौतरफा गिरावट के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव साफ देखा जा सकता है।
IT और टेक सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट
Share Market Crash: आज की गिरावट में सबसे ज्यादा मार आईटी (IT Sector) और टेक शेयरों पर पड़ी है। दिग्गज कंपनियां जैसे TCS, Infosys, और HCL Tech के शेयरों में 3% से लेकर 6% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का मानना है कि वैश्विक मांग में कमी और डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव की वजह से आईटी कंपनियों के भविष्य के मुनाफे पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
अमेरिकी बाजार से मिले संकेतों ने बिगाड़ा खेल
Share Market Crash: भारतीय बाजार में आई इस सुनामी के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी बाजारों (US Market) की कमजोरी है। अमेरिकी मार्केट में पिछले तीन दिनों से लगातार गिरावट जारी है, जिसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी निवेशकों को लगभग 90 लाख करोड़ रुपये के बराबर मार्केट कैप का नुकसान हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बदलती तकनीक को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने टेक शेयरों में बिकवाली को और तेज कर दिया है।
गिरावट के 5 मुख्य कारण जिन पर आपको नजर रखनी चाहिए:
ग्लोबल सेल-ऑफ: अमेरिकी और एशियाई बाजारों में मंदी की आशंका के चलते बिकवाली।
आईटी सेक्टर पर दबाव: वैश्विक मांग में सुस्ती और बड़ी टेक कंपनियों के कमजोर नतीजे।
डॉलर इंडेक्स की मजबूती: डॉलर की मजबूती से उभरते बाजारों (Emerging Markets) से विदेशी फंड बाहर निकल रहे हैं।
वैल्यूएशन की चिंता: स्टार्टअप्स और फिनटेक कंपनियों के ओवर-वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की सतर्कता।
भू-राजनीतिक तनाव: वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के चलते निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
Share Market Crash: बाजार के जानकारों का कहना है कि ऐसी गिरावट में घबराहट (Panic Selling) में आकर फैसला लेना नुकसानदेह हो सकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखें और केवल क्वालिटी शेयरों में ही लॉन्ग टर्म निवेश (Long Term Investment) का नजरिया रखें। बाजार में अस्थिरता अभी कुछ समय तक बनी रह सकती है, इसलिए नई खरीदारी में सावधानी बरतें।



















