सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी: तेज रफ्तार ट्रक ने 4 को रौंदा, प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति
रात होते ही हाईवे और शहर की सड़कें बन रहीं 'गौशाला', निगम की टीम पकड़कर जंगल में छोड़ देती है, वापस लौट आते हैं जानवर।

रायगढ़। सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी: तेज रफ्तार ट्रक ने 4 को रौंदा, प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति, शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों का आतंक जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन की ओर से कोई ठोस और स्थायी समाधान न होने के कारण रात का अंधेरा होते ही शहर की मुख्य सड़कें और हाईवे आवारा मवेशियों के लिए ‘गौशाला’ बन जाते हैं। इसका खामियाजा न सिर्फ वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है, बल्कि बेजुबान जानवरों की भी दर्दनाक मौत हो रही है।
हाल ही में रायगढ़-चंद्रपुर नेशनल हाईवे पर एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पर बैठे सात मवेशियों को रौंद दिया, जिसमें से चार की मौके पर ही मौत हो गई।सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी
प्रशासन की अधूरी कार्रवाई: पकड़कर फिर छोड़ देते हैं
शहर के नागरिक लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं। दिन के उजाले में जहां सांढ़ों की लड़ाई से राहगीरों और वाहनों को नुकसान पहुंचता है, वहीं रात के अंधेरे में ये मवेशी सड़क पर बैठकर हादसों को न्योता देते हैं।सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी
नगर निगम की कार्रवाई महज दिखावा बनकर रह गई है। कुछ दिनों पहले निगम की टीम ने अभियान चलाकर कुछ मवेशियों को पकड़ा जरूर, लेकिन उन्हें पास के किसी गौठान या जंगल में छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही दिनों में वे वापस शहर की सड़कों पर आ गए। निगम अधिकारियों का दावा है कि मवेशियों को पकड़ने के लिए एक टीम बनाई गई है, लेकिन जमीन पर इस टीम का काम कहीं नजर नहीं आता।सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी
हालिया दर्दनाक हादसा: ट्रक ने 4 मवेशियों को रौंदा
ताजा मामला रायगढ़-चंद्रपुर NH पर स्थित कोड़ातराई गांव का है, जहां बीती रात करीब 10:30 बजे सात मवेशी सड़क किनारे बैठे थे। रायगढ़ की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने सभी को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयानक हादसे में चार मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने ट्रक चालक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया, जिसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी
अधिकारियों के पास नहीं कोई ठोस जवाब
जब इस बारे में निगम के स्वास्थ्य अधिकारी और काउ कैचर टीम के नोडल अधिकारी शिव यादव से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि मवेशियों को पकड़कर अक्सर जंगल या पास के गौठान में छोड़ दिया जाता है, जिससे वे वापस लौट आते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सांढ़ों की संख्या बढ़ने का एक कारण शहर के आसपास चल रहे खटाल (डेयरी) भी हैं। फिलहाल, मवेशी मालिकों पर सिर्फ 100 से 200 रुपये का मामूली जुर्माना लगाया जा रहा है, जो इस समस्या को रोकने के लिए नाकाफी है।सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इन बेजुबान जानवरों को संरक्षित करने के लिए एक स्थायी विजन के साथ काम करना चाहिए, ताकि इंसानों और जानवरों, दोनों की जान बचाई जा सके।सड़कों पर ‘मौत’ बनकर घूम रहे आवारा मवेशी



















