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बिलासपुर

पिट एनडीपीएस के तहत सख्त कार्रवाई: संभाग आयुक्त ने रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को जेल भेजा

बिलासपुर : बिलासपुर संभाग के आयुक्त ने पिट एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कदम उठाते हुए रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को तीन महीने के लिए जेल भेज दिया। दोनों पर नशीले पदार्थों की तस्करी में बार-बार शामिल होने का आरोप है। संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने इनके खिलाफ आयुक्त के समक्ष इस्तगासा पेश किया था। पिट एनडीपीएस के तहत सख्त कार्रवाई: संभाग आयुक्त ने रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को जेल भेजा

दोनों आरोपियों पर गंभीर आरोप

  1. रमेश दुबे (थाना कोटा):
    • अपराध क्रमांक 317/2019: 0.260 किलो गांजा जब्त।
    • अपराध क्रमांक 513/2019: 1.2 किलो गांजा जब्त।
    • अपराध क्रमांक 247/2021: 0.50 किलो गांजा जब्त।
      इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने दुबे के पुनः अपराध करने की संभावना जताई। इसे रोकने के लिए तीन महीने की जेल की सजा दी गई। पिट एनडीपीएस के तहत सख्त कार्रवाई: संभाग आयुक्त ने रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को जेल भेजा
  2. चूड़ामणि साहू (थाना बाराद्वार):
    • 2020 में 20.5 किलो गांजा के मामले में दोष सिद्ध।
    • पुलिस ने तस्करी की पुनरावृत्ति रोकने और समाज पर बुरा प्रभाव न पड़ने के लिए पिट एनडीपीएस के तहत कार्रवाई की मांग की। पिट एनडीपीएस के तहत सख्त कार्रवाई: संभाग आयुक्त ने रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को जेल भेजा

क्या है पिट एनडीपीएस एक्ट?

पिट (PIT):
पिट का मतलब है प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक हिरासत)। इसे NDPS एक्ट के तहत उन लोगों पर लागू किया जाता है जो बार-बार नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार में शामिल पाए जाते हैं।

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क्यों जरूरी है यह कानून?

  1. जन स्वास्थ्य की रक्षा:
    नशीले पदार्थों का अवैध व्यापार समाज और जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
  2. अन्य अपराधों का जुड़ाव:
    नशे का कारोबार अन्य अपराधों जैसे हथियार तस्करी और हत्या से जुड़ा हो सकता है।
  3. अपराध की पुनरावृत्ति रोकना:
    यदि व्यक्ति पहले भी नशे के कारोबार में लिप्त पाया गया है, तो इसे दोहराने से रोकने के लिए यह कानून इस्तेमाल किया जाता है। पिट एनडीपीएस के तहत सख्त कार्रवाई: संभाग आयुक्त ने रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को जेल भेजा

कैसे काम करता है पिट एनडीपीएस एक्ट?

  1. हिरासत में लेना:
    संदिग्ध व्यक्ति को नशे के कारोबार में संलिप्त पाए जाने पर हिरासत में लिया जाता है।
  2. न्यायिक समीक्षा का अधिकार:
    हिरासत के आदेश को व्यक्ति अदालत में चुनौती दे सकता है।
  3. सख्त कार्रवाई:
    यह कानून केवल गंभीर मामलों में लागू किया जाता है। हिरासत के दौरान व्यक्ति को अपने अधिकारों का बचाव करने के लिए वकील रखने की अनुमति होती है। पिट एनडीपीएस के तहत सख्त कार्रवाई: संभाग आयुक्त ने रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को जेल भेजा

समाज पर असर

पिट एनडीपीएस के तहत की गई यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यह कदम समाज में नशे के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की जरूरत को दर्शाता है। पिट एनडीपीएस के तहत सख्त कार्रवाई: संभाग आयुक्त ने रमेश दुबे और चूड़ामणि साहू को जेल भेजा

Nidar Chhattisgarh Desk

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