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स्कूल में कलेक्टर की बातों का हुआ ऐसा असर कि कई मुश्किलो का सामना कर बन गई डिप्टी कलेक्टर

नगरी-सिहावा की रेखा चंद्रा का रायपुर में सम्मान

NCG News desk Raipur:- 

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रायपुर। उस वक्त मै कक्षा पांचवी की छात्रा थी। हमारे स्कूल में कलेक्टर साबिहा इशिता राय आईं थी। उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर कई बातें की। उनकी बातचीत का लहजा और बदलाव की सोच से मैं काफी प्रभावित हुई। तभी से में सिविल सर्विसेस के बारे में सोचने लगी थी। मैंने घर में आकर पापा को भी बताया। पापा ने मुझे शाबाशी देते हुए प्रोत्साहित किया। वक्त गुजरता गया। मैंने कोशिश शुरू की। 3 बार असफलता मिली। लगता था मंजिल तक पहुंचना आसान नहीं था लेकिन कोई एक चीज थी जो मुझे बांधी रखती थी। विश्वास खुद पर। यकीन मेहनत पर। यह कहना है डिप्टी कलेक्टर रेखा चंद्रा का।

स्कूल में कलेक्टर की बातों का हुआ ऐसा असर कि कई मुश्किलो का सामना कर बन गई डिप्टी कलेक्टर

रायपुर में आयोजित कूर्मि संझा कार्यक्रम में रेखा का सम्मान किया गया। जहा उन्होंने अपनी जर्नी शेयर की।स्कूल में कलेक्टर की बातों का हुआ ऐसा असर कि कई मुश्किलो का सामना कर बन गई डिप्टी कलेक्टर.

सुनाई देना हो गया था बंद

रेखा ने बताया कि कक्षा 12वीं में अचानक उन्हें सुनाई देना बंद हो गया। ये समय मेरे लिए बड़ी चुनौती था। लगता था मेरे अरमान अधूरे रह जाएंगे। जिस सपने को लेकर में जिया करती थी वह वक्त से पहले ही टूट गए थे। मुझे कोई राह दिखाई नहीं दे रही थी। आर्टिफिशयल मशीन का यूज किया और मंजिल की ओर कदम बढ़ाए। मैंने आईएएस की तैयारी शुरू की थी लेकिन तबीयत के चलते दिल्ली से लौटना पड़ा। यहां पीएससी की तैयारी शुरू की।स्कूल में कलेक्टर की बातों का हुआ ऐसा असर कि कई मुश्किलो का सामना कर बन गई डिप्टी कलेक्टर.

चौथी बार में मिली सफलता

असफलता को सफलता की सीढ़ी कहा जाता है। इसलिए मैंने हर नाकामयाबी से कुछ न कुछ सीखा। पीएससी में 3 बार सक्सेस को फिसलते देखा। चौथे बार में क्लियर किया। अभी पोस्टिंग कवर्धा में हुई है जहां दो साल की ट्रेनिंग है। इस यूपीएससी और पीएससी में आंसर राइटिंग का काफी महत्व होता है। इंटरव्यू में लीडरशिप से जुड़े सवाल पूछे गए। इंटरव्यू के दौरान आपका नॉलेज नहीं देखा जाता, क्योंकि ज्ञान के जरिए तो आप यहां तक पहुंचे होते हैं। इसमें आपको एटिट्यूड और चीजों को कैसे सरल तरीके से हैंडल कर सकते हैं यह परखा जाता है।स्कूल में कलेक्टर की बातों का हुआ ऐसा असर कि कई मुश्किलो का सामना कर बन गई डिप्टी कलेक्टर.

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