गांवों को रोशन करने की योजना पर विभागीय ‘ग्रहण’, क्रेडा की अनुमति के बिना अटकी सोलर लाइटें

गांवों को रोशन करने की योजना पर विभागीय ‘ग्रहण’, क्रेडा की अनुमति के बिना अटकी सोलर लाइटें, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सोलर योजना छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में विभागीय खींचतान के कारण अधर में लटक गई है। एक तरफ सरकार गांवों को सोलर लाइट से रोशन करना चाहती है, तो वहीं दूसरी ओर क्रेडा (CREDA) विभाग की अनुमति न मिलने से ग्राम पंचायतों में काम पूरी तरह से ठप पड़ा है। इससे सरपंचों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
क्यों और कहाँ फंसा है पेंच?
जांजगीर-चांपा जिले की सभी ग्राम पंचायतों में सोलर सिस्टम लगाए जाने हैं, लेकिन यह योजना दो विभागों की आपसी तनातनी का शिकार हो गई है।गांवों को रोशन करने की योजना पर विभागीय ‘ग्रहण’
क्रेडा की अनिवार्यता: शासन के निर्देशानुसार, यह काम क्रेडा (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) के माध्यम से ही होना है।
सरपंचों की मांग: वहीं, सरपंच और स्थानीय पदाधिकारी यह काम आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) के माध्यम से कराना चाहते हैं, जैसा कि पहले होता आया है।
तकनीकी स्वीकृति (TS) पर रोक: काम शुरू करने के लिए बिलासपुर स्थित क्रेडा कार्यालय की एसडीओ से तकनीकी स्वीकृति (TS) लेना अनिवार्य है। लेकिन अधिकारी आरईएस के माध्यम से काम करने की अनुमति नहीं दे रही हैं, जिससे पूरा प्रोजेक्ट रुका हुआ है।
दो विभागों की खींचतान में पिस रहे सरपंच और ग्रामीण
इस विभागीय लड़ाई का सीधा खामियाजा सरपंचों और आम ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। सरपंचों का कहना है कि वे काम कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन क्रेडा अधिकारी की अनुमति न मिलने के कारण वे बेबस हैं। उनका आरोप है कि एक ओर सरकार योजना का जोर-शोर से प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी ही इसमें अड़ंगा लगा रहे हैं।गांवों को रोशन करने की योजना पर विभागीय ‘ग्रहण’
क्या कहना है क्रेडा अधिकारी का?
इस मामले पर क्रेडा की एसडीओ ममता राही ने स्पष्ट किया कि वह केवल सरकारी दिशानिर्देशों का पालन कर रही हैं। उन्होंने कहा, “शासन के गाइडलाइन के मुताबिक सोलर सिस्टम का काम क्रेडा के माध्यम से ही होना है। फिलहाल आरईएस से काम की स्वीकृति नहीं दी जा रही है। भविष्य में जो भी नए निर्देश आएंगे, उनके अनुसार ही काम किया जाएगा।” गांवों को रोशन करने की योजना पर विभागीय ‘ग्रहण’
गांवों में अंधेरा, पुराने सिस्टम हो चुके हैं कबाड़
यह समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि गांवों में पहले लगाए गए ज्यादातर सोलर सिस्टम 10 साल से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं और पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। इन पुराने सिस्टमों के कबाड़ हो जाने से गांवों में शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। ग्रामीण और पंचायत पदाधिकारी लंबे समय से नई सोलर लाइटें लगने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनके गांव एक बार फिर रोशन हो सकें, लेकिन यह इंतजार bureaucratic hurdles की वजह से लंबा होता जा रहा है।गांवों को रोशन करने की योजना पर विभागीय ‘ग्रहण’



















