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भांठापारा-बलौदाबाजार

बारनवापारा अभयारण्य में फिर गूंजी बाघ की दहाड़: बढ़ी वन विभाग की मुस्तैदी, 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान जारी

कैमरों से लोकेशन ट्रैकिंग, दिन में दो शिफ्टों में पैदल गश्त; बाघ को शिकारियों से बचाने और मानव–बाघ टकराव रोकने पर विशेष फोकस

CG News। बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा अभयारण्य में एक बार फिर टाइगर की उपस्थिति दर्ज होने से वन विभाग अलर्ट मोड पर है। लगभग ढाई वर्ष के नर बाघ के दिखाई देने के बाद यहां वन्यजीव संरक्षण की गतिविधियां तेज हो गई हैं। बीते कुछ दिनों में विभिन्न इलाकों में बाघ के ताजा फुट मार्क (पंजों के निशान) मिलने से उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है।

वन विभाग की टीमें बाघ की मूवमेंट को सुरक्षित रूप से ट्रेस करने में जुटी हैं, ताकि न तो उसे कोई खतरा हो और न ही स्थानीय ग्रामीणों के सामने आने की स्थिति बने।बढ़ी वन विभाग की मुस्तैदी, 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान जारी

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 बाघ की सुरक्षा और मानव–बाघ संघर्ष की रोकथाम

टाइगर की दस्तक के बाद वन विभाग की जिम्मेदारियां दोगुनी हो गई हैं।
मौजूदा समय में—

  • 70–80 वनकर्मियों की तैनाती

  • 20–25 वन विकास निगम कर्मचारियों की अतिरिक्त टीम

  • कुल मिलाकर 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान

रोजाना दो शिफ्टों में जंगल के अलग-अलग हिस्सों में पैदल गश्त की जा रही है।
प्रत्येक टीम में 7–8 सदस्य शामिल हैं, जो रोजाना 12–15 किमी पैदल चलकर बाघ की लोकेशन का पता लगा रहे हैं।बढ़ी वन विभाग की मुस्तैदी, 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान जारी

कैसे ट्रेस किया जा रहा है टाइगर की लोकेशन?

वन विभाग द्वारा आधुनिक तकनीक और मैदानी प्रयासों को मिलाकर ट्रैकिंग की जा रही है—

  • जंगल के सक्रिय मार्गों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं

  • टीमों द्वारा लगातार फुट मार्क की तलाश

  • प्रतिदिन 15–20 किमी पैदल चलकर मूवमेंट का अनुमान

  • बरबसपुर और बारनवापारा मार्ग के दोनों ओर निगरानी

बीते सप्ताह टाइगर नजर आया था, लेकिन पिछले दो दिनों से वह कैमरे में नहीं दिखा है। हालांकि रानीखोल पहाड़ी, सिंघनगढ़ किला क्षेत्र, कक्ष क्रमांक 84–85 के आसपास उसके पंजों के ताजा निशान मिले हैं, जिससे पता चलता है कि वह अभी भी बलौदाबाजार वन मंडल में ही घूम रहा है।बढ़ी वन विभाग की मुस्तैदी, 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान जारी

30 साल बाद दोबारा गूंजी दहाड़

मार्च 2024 में लगभग तीन दशकों बाद बारनवापारा अभयारण्य में बाघ की दहाड़ सुनाई दी थी। अब लगभग पौने दो वर्ष बाद फिर एक बार बाघ की दस्तक होने से उम्मीदें भी बढ़ी हैं और चुनौतियां भी।बढ़ी वन विभाग की मुस्तैदी, 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान जारी

वन विकास निगम की फील्ड टीम ने गश्त के दौरान जब ताजा, गहरे और बड़े पंजों के निशान देखे, तो पुष्टि हुई कि यह एक परिपक्व नर बाघ है, जो संभवतः पड़ोसी राज्य के जंगलों से यहां पहुंचा है। ग्रामीणों और गाइडों ने भी इसे देखे जाने की पुष्टि की है।बढ़ी वन विभाग की मुस्तैदी, 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान जारी

वन विभाग की अपील

कसडोल एसडीओ अनिल वर्मा ने बताया कि सर्चिंग और सुरक्षा कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि—

  • जंगल के संवेदनशील क्षेत्रों में न जाएं

  • किसी भी गतिविधि या आवाजाही की सूचना तुरंत वन विभाग को दें

बारनवापारा अभयारण्य में बाघ की वापसी जहां जैव विविधता के लिए शुभ संकेत है, वहीं वन विभाग की सतर्कता यह सुनिश्चित करने के लिए है कि यह विरासत सुरक्षित रहे और किसी तरह का अप्रिय मानव–वन्यजीव संघर्ष न हो।बढ़ी वन विभाग की मुस्तैदी, 100 से अधिक कर्मचारियों का सर्च अभियान जारी

Pooja Chandrakar

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