पूर्वी चंपारण (बिहार): सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल: भारत की गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर बिहार के पूर्वी चंपारण से सामने आई है। यहाँ बन रहे दुनिया के सबसे ऊंचे ‘विराट रामायण मंदिर’ के लिए एक मुस्लिम परिवार ने अपनी करोड़ों की जमीन दान कर दी है। यह कदम न केवल धार्मिक सद्भाव का संदेश दे रहा है, बल्कि हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
इश्तियाक अहमद खान के परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल
सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल: मूल रूप से चंपारण के कैथवलिया गांव के रहने वाले और वर्तमान में गुवाहाटी में व्यापार कर रहे इश्तियाक अहमद खान ने अपने परिवार के साथ मिलकर मंदिर निर्माण के लिए 23 कट्ठा (लगभग 2 एकड़) जमीन दान की है। इस जमीन की सरकारी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई है। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव सायन कुणाल ने सोशल मीडिया पर इस दान की जानकारी साझा करते हुए इसे ‘हिंदू विरासत का जीवंत प्रतीक’ बताया है। इस दान के बाद क्षेत्र के अन्य ग्रामीण भी मंदिर के लिए रियायती दरों पर जमीन देने आगे आ रहे हैं।
अयोध्या के राम मंदिर से भी ऊंचा और भव्य होगा यह धाम
सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल: बिहार के केसरिया (कल्याणपुर ब्लॉक) में बन रहा ‘विराट रामायण मंदिर’ कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा और सबसे बड़ा रामायण मंदिर होगा।
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ऊंचाई: 270 फीट।
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लंबाई और चौड़ाई: 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा।
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शिखर और मंदिर: इस विशाल परिसर में कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे।
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निर्माण सामग्री: उत्तर प्रदेश के गुलाबी चुनार पत्थर और राजस्थानी नक्काशी का उपयोग किया जा रहा है।
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तकनीक: इसे भूकंप-रोधी तकनीक से बनाया जा रहा है और यहाँ हेलीपैड की सुविधा भी होगी।
परिसर में विराजेगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग
सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल: विराट रामायण मंदिर की एक और बड़ी खासियत यहाँ स्थापित होने वाला दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम में विशेष काले पत्थर से निर्मित यह शिवलिंग 47 दिनों की लंबी यात्रा तय कर 5 जनवरी को मंदिर परिसर पहुँचा है।
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स्थापना तिथि: 17 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।
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महा-अभिषेक: गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, मानसरोवर और सोनपुर के पवित्र जल से शिवलिंग का जलाभिषेक होगा।
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पुष्प वर्षा: स्थापना के अवसर पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश करने की भव्य तैयारी है।
पर्यटन और आस्था का संगम
सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल: लगभग 1000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बन रहा यह मंदिर अगले 5 वर्षों में पूर्ण होने की उम्मीद है। ऐतिहासिक केसरिया बौद्ध स्तूप के समीप और राम-जानकी मार्ग पर स्थित होने के कारण यह स्थान भविष्य में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और आस्था का एक बड़ा केंद्र बनेगा। यहाँ रामायण के विभिन्न प्रसंगों को सजीव चित्रण के माध्यम से दर्शाया जाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ेगा।