Mothers Day Special: भोपाल में बेटे का अनूठा प्रेम, मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा, गर्मी में AC और सर्दी में गर्म कपड़े… गजब है ये प्रेम

भोपाल में बेटे का अनूठा प्रेम, मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा, गर्मी में AC और सर्दी में गर्म कपड़े… गजब है ये प्रेम
मां यानी जननी, जिसने हमें पैदा किया, संस्कार दिए, सही-गलत की सीख दी। मां यानी शक्ति का प्रतीक और मां यानी मानवता का एक महत्वपूर्ण आधार। उनका स्नेह और समर्थन हमें जीवन में सफलता की दिशा में आगे बढ़ाता है। हर धर्म और संस्कृति में मां का विशेष दर्जा है। मां के बिना जीवन अधूरा होता है, इसलिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बेटे ने अपनी मृत मां को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी मूर्ति बनवाई हैl
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NCG News desk Bhopal :-
मां यानी जननी, जिसने हमें पैदा किया, संस्कार दिए, सही-गलत की सीख दी। मां यानी शक्ति का प्रतीक और मां यानी मानवता का एक महत्वपूर्ण आधार। उनका स्नेह और समर्थन हमें जीवन में सफलता की दिशा में आगे बढ़ाता है। हर धर्म और संस्कृति में मां का विशेष दर्जा है। मां के बिना जीवन अधूरा होता है, इसलिए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बेटे ने अपनी मृत मां को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी मूर्ति बनवाई हैl(मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा)
2021 में हुआ था निधन
दरअसल, 14 फरवरी, 2021 को अर्चना शुक्ला का निधन हो गया था। उनके निधन से पूरा परिवार टूट गया। अर्चना शुक्ला का कोमा और कार्डियक अरेस्ट से जूझने के बाद 58 साल की उम्र में निधन हो गया था। उनकी यादों को संजोने के लिए उत्सुक परिवार ने कुछ ऐसा करने का सोचा जो अविश्वसनीय है। आप मृत अर्चना शुक्ला से अभी भी भोपाल के शुक्ला परिवार में मिल सकते हैं। अर्चना शुक्ला के बेटे कुलदीप शुक्ला ने मां के जैसी ढ़ेर सारी समानताओं वाली एक सिलिकॉन मूर्ति बनवाई है। फर्क सिर्फ इतना है कि ये बोलती नही है। अर्चना के 34 वर्षीय सरकारी अधिकारी बेटे कुलदीप शुक्ला कहते हैं, ‘यह हमें महसूस कराता है कि मां आसपास हैं।'(मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा)
पहले वृद्धाश्रम में मूर्ति लगाने का था प्लान
कुलदीप ने शुरू में एक वृद्धाश्रम ‘आसरा’ में उनकी प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, एक स्थानीय कलाकार ने उन्हें सिलिकॉन मूर्ति का सुझाव दिया। कुलदीप कहते हैं कि मुझे यह आईडिया पसंद आया। उन्होंने कहा, ‘हमें कोलकाता में एक कलाकार मिला, जो मेरी मां की आदमकद मूर्ति बनाने को तैयार हो गया।’ (मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा)
15 बार रिजेक्ट की मूर्ति
हालांकि ये काफी मुश्किल था। कुलदीप हर छोटी-छोटी बात पर ध्यान देते थे और उन्होंने आर्टिस्ट की कम से कम 15 शुरुआती कोशिश खारिज कर दी। आखिरकार कलाकार ने वो मूर्ति बना ही दी, जिसका कुलदीप को इंतजार था। हूबहू कुलदीप की मां अर्चना शुक्ला से मिलती हुई ये मूर्ति अद्भुद है। कुलदीप के शब्दों में यह एक ‘उत्कृष्ट कृति’ थी। इसकी लागत 4 लाख रुपये है और इसकी 50 साल की गारंटी दी गई है।(मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा)

सिलिकॉन की मूर्ति की अर्चना शुक्ला से काफी समानता देखकर रिश्तेदार और घर आने वाले गेस्ट भी चौंक जाते हैं। कई लोग अब भी इसे जीवित व्यक्ति समझने की भूल करते हैं। यह प्रतिमा अब परिवार के डाइनिंग रूम के सामने रहती है। अब यह उनके स्थायी प्रेम और गर्मजोशी की मूक लेकिन हमेशा मौजूद रहने वाली याद बन गई है।(मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा)
घर में हर अवसर पर अपनी मां की उपस्थिति की कुलदीप की इच्छा मूर्ति की स्थापना के साथ पूरी हुई। जब 27 अगस्त, 2023 को आसरा की नई इमारत का उद्घाटन किया गया, तो मेहमान तब दंग रह गए जब एक ‘विशेष अतिथि’ की घोषणा हुई। एक कुर्सी पर बैठी शुक्ला की मां की मूर्ति में सजीव समानता ने कई लोगों की आंखों में आंसू ला दिए। परिवार प्रतिमा के साथ ऐसे व्यवहार करता है जैसे वह जीवित हो। वे सर्दियों में प्रतिमा को गर्म कपड़े पहनाते हैं और गर्मियों में एसी चालू रखते हैं। कुलदीप ने कहा, ‘आज, मेरे बच्चे मूर्ति को छूते हैं और उससे ऐसे बातचीत करते हैं जैसे वे अपनी जीवित दादी से बात कर रहे हों। यह अमूल्य है।(मां को खोने के बाद बनवाई हूबहू प्रतिमा)



















