छत्तीसगढ़ में विवादों का बवंडर: उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम से सांसद गायब, भाषा के अपमान पर भड़के युवा
राजनांदगांव में पोस्टर पॉलिटिक्स से गरमाई भाजपा की आंतरिक कलह; दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ी भाषा के अपमान पर कड़ी कार्रवाई की मांग।

छत्तीसगढ़ में विवादों का बवंडर: उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम से सांसद गायब, भाषा के अपमान पर भड़के युवा. छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों दोहरे विवादों से घिरी हुई है। एक तरफ राजनांदगांव में उपराष्ट्रपति के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम से स्थानीय सांसद का चेहरा गायब होने से भाजपा की आंतरिक गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया और एक टीवी डिबेट में छत्तीसगढ़ महतारी और छत्तीसगढ़ी भाषा के अपमान को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
राजनांदगांव में पोस्टर पॉलिटिक्स और सांसद की गैरमौजूदगी:
5 नवंबर को राजनांदगांव में आयोजित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ और ‘स्व. गुपाल किशोर जी साहू स्मृति उदयपाल मल्टीस्पेशलिटी आई कैंसर इंस्टिट्यूट’ के शुभारंभ कार्यक्रम में देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस भव्य आयोजन की तैयारियों के बीच शहर में लगे बैनर-पोस्टर और जिला प्रशासन द्वारा जारी निमंत्रण पत्र से राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय का नाम और फोटो पूरी तरह नदारद रहा। जहाँ मुख्यमंत्री, संगठन के पदाधिकारी और स्थानीय नेता प्रमुखता से दिखाई दिए, वहीं सांसद का उल्लेख तक नहीं था।छत्तीसगढ़ में विवादों का बवंडर: उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम से सांसद गायब
इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह प्रोटोकॉल की गलती नहीं, बल्कि ‘ऊपर से मिले निर्देशों’ का नतीजा है, जो पार्टी की आंतरिक गुटबाजी की ओर इशारा करता है। एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर इसे ‘राजनीतिक मंशा’ करार दिया। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा में अब पोस्टर से ही तय होता है कि कौन किस गुट में है, और जहाँ अपने ही सांसद गायब हो जाएँ, वहाँ एकता की बात बेमानी है। फिलहाल, इस मामले पर न तो जिला प्रशासन और न ही भाजपा संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है, लेकिन इस घटना ने राजनांदगांव की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें तेज कर दी हैं।छत्तीसगढ़ में विवादों का बवंडर: उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम से सांसद गायब
छत्तीसगढ़ी अस्मिता के अपमान पर युवाओं का रोष:
दूसरी ओर, ‘दीपक लालवानी23’ नामक इंस्टाग्राम अकाउंट से छत्तीसगढ़ महतारी के लिए अपशब्दों का प्रयोग और प्रदेश के लोगों को ‘भिखारी’ कहने के मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। इसके साथ ही, एक टीवी डिबेट के दौरान विनय बजाज द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा को ‘निचली जाति की भाषा’ बताए जाने की टिप्पणी ने भी युवाओं में गहरा आक्रोश पैदा किया है।छत्तीसगढ़ में विवादों का बवंडर: उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम से सांसद गायब
युवाओं ने इन बयानों को प्रदेश की अस्मिता और संस्कृति का अपमान बताते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अंकित पोटाई के नेतृत्व में थाने पहुँचे युवाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि ऐसे बयान समाज में वैमनस्य और विभाजन फैलाते हैं, और सरकार तथा प्रशासन को ऐसे मामलों पर सख्त रुख अपनाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति प्रदेश की भाषा या संस्कृति का अपमान करने की हिम्मत न करे।छत्तीसगढ़ में विवादों का बवंडर: उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम से सांसद गायब
इन दोनों घटनाओं ने छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में गहमागहमी बढ़ा दी है, और सबकी निगाहें अब प्रशासन और राजनीतिक दलों की आगामी प्रतिक्रियाओं पर टिकी हैं।छत्तीसगढ़ में विवादों का बवंडर: उपराष्ट्रपति के कार्यक्रम से सांसद गायब



















