छत्तीसगढ़ी समाचार
कोन सुनही हमर दुःख पीरा

कोन सुनही हमर दुःख पीरा
किसान मजदूर के दुःख पीरा,
कोन सरकार हरही रे ?
सोना कस धान,
माटी के मोल बिकत हे।
खातू माटी अउ दवाई,
हीरा कस नोहर भाव।
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जिनगी भर जांगर तैं पेरे,
जम्मों ल देवाच चाउंर दार।
तोर कल्पना कोन सुनही,?
अंधरा भैरा अब के नेता,
तोर हित बर थोरहे गुनही।
चुनाव के बेरा नेता मन कहिथे,
विकास के रद्दा गढ़बो।
किसान भाई मनके,
दुःख पीरा हरबो।
बड़े बड़े गोठ करथे,
लबारी मारथे भारी गा।
ये दरी के चुनाव म,
लालच के लाटा नइ खावन।
जुर मिल के जम्मों किसान भाई,
समारु बुधारु ल जिताबो।
छत्तीसगढ़िया मान सम्मान खातिर,
नवा सुराज के बिहान लाबो।
डाकेश्वर ‘डग्गू’ वर्मा,
ग्राम देवसुन्द्रा, पलारी












