छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में 48 करोड़ का घोटाला, अफसरों ने टेंडर की आड़ में की लूट!

छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में 48 करोड़ का घोटाला, अफसरों ने टेंडर की आड़ में की लूट!
- सीलिंग फैन, रेगुलेटर, एलईडी टीवी, वाटर फिल्टर, कुर्सी, टेबल, प्लास्टिक कंटेनर, झाड़ू तक का घपला!
- चुनाव से पहले अफसरों और कारोबारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को लगा करोड़ों का चूना
48 करोड़ का घोटाला: टेंडर घोटाले से उजागर हुआ बड़ा भ्रष्टाचार
छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले 4750 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 48 करोड़ रुपये की सामग्री खरीदी गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इनमें से अधिकांश सामग्री गायब है। अफसरों और कारोबारियों की मिलीभगत से फर्जी टेंडर और बिलों के माध्यम से सरकारी धन का बड़ा दुरुपयोग किया गया।छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में 48 करोड़ का घोटाला
कैसे हुआ घोटाला?
- टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया।
- गुणवत्ता विहीन और जरूरत से ज्यादा वस्तुएं ऊंची कीमतों पर खरीदी गईं।
- फर्जी बिलिंग और कागजी खानापूर्ति कर करोड़ों रुपये का गबन किया गया।
क्या-क्या खरीदा गया? लेकिन ज़मीन पर नहीं दिखा!
महिला एवं बाल विकास विभाग ने चुनावी आपाधापी में निम्नलिखित वस्तुओं की खरीदारी की:-
- सीलिंग फैन और रेगुलेटर (जहां बिजली कनेक्शन ही नहीं था!)
- एलईडी टीवी (ब्लैक एंड वाइट)
- राइटिंग बोर्ड, आरओ वाटर फिल्टर, कुर्सी, टेबल, आयरन रैक
- प्लास्टिक के वॉटर कंटेनर, बाल्टी, घमेला और झाड़ू
इनमें से अधिकांश वस्तुएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंची ही नहीं। जो पहुंची, वे खराब गुणवत्ता की थीं।
कौन हैं इस घोटाले के मुख्य आरोपी?
इस घोटाले के तार पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया, उनके करीबी अनिल लोढ़ा और विभागीय उप संचालक सुनील शर्मा से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में 48 करोड़ का घोटाला
कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम?
- टेंडर प्रक्रिया में धांधली कर अपने करीबी कारोबारियों को ठेके दिलाए गए।
- ऊंची कीमतों पर खरीदी गई सामग्री को आंगनबाड़ी केंद्रों तक भेजने का नाटक किया गया।
- चुनावी माहौल का फायदा उठाकर फर्जी बिलों के जरिए पैसे निकाल लिए गए।
कौन-कौन से जिलों में हुआ सबसे ज्यादा गबन?
यह घोटाला प्रदेश के 12 जिलों में बड़े पैमाने पर हुआ, जिसमें शामिल हैं:-
बस्तर (600), बीजापुर (200), दंतेवाड़ा (300), कांकेर (600), कोंडागांव (500), नारायणपुर (100), सुकमा (250), कोरबा (700), राजनांदगांव (450), महासमुंद (600), मोहला मानपुर (250), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (200)
ज्यादातर स्थानों पर सामान सिर्फ कागजों में खरीदा गया, जबकि केंद्रों में कुछ भी नहीं भेजा गया!छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में 48 करोड़ का घोटाला
विद्युत उपकरणों की खरीद, लेकिन बिना बिजली के केंद्र!
कई केंद्रों के लिए विद्युत उपकरण (सीलिंग फैन, एलईडी टीवी, रेगुलेटर) खरीदे गए, लेकिन इन केंद्रों में बिजली कनेक्शन तक नहीं था।
अधिकारियों ने यह जांचने की जहमत तक नहीं उठाई कि केंद्रों में बिजली है भी या नहीं!
दस्तावेज गायब, जांच को प्रभावित करने की साजिश!
सूत्रों के मुताबिक, सुनील और अनिल नामक कारोबारियों ने कई महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज गायब करवा दिए।
इन दस्तावेजों में पिछले 5 वर्षों के टेंडर, स्वीकृति, भुगतान और अन्य लेखा-जोखा था।
घोटाले की जांच रोकने के लिए अधिकारियों ने इन कारोबारियों की मदद की।
क्या कह रहे हैं पीड़ित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता?

- “हमने जो सामग्री मंगाई थी, वह आई ही नहीं। और जो आई, वह इतनी घटिया थी कि इस्तेमाल भी नहीं कर सकते।”
- “टेंडर में अफसरों और कारोबारियों की मिलीभगत से हमें जानबूझकर खराब सामान भेजा गया।”
- कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजी गई घटिया सामग्री आज भी स्टोर रूम में पड़ी धूल खा रही है।
क्या कह रही है सरकार?

- राज्य सरकार ने इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
- कई अफसरों को शामिल होने के संदेह में पूछताछ के लिए बुलाया गया।
- 500 करोड़ तक के गबन का अंदेशा, जांच के बाद हो सकते हैं बड़े खुलासे।
क्या होगी दोषियों को सजा?
- अगर जांच में दोषी पाए गए, तो महिला एवं बाल विकास विभाग के कई अधिकारी बर्खास्त और गिरफ्तार हो सकते हैं।
- भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल कारोबारियों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
- राज्य सरकार के दबाव में जांच को प्रभावित करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और जनता की मांग है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
जनता के पैसे पर डाका, न्याय की मांग तेज!

छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास विभाग का 48 करोड़ का यह घोटाला दिखाता है कि कैसे सरकारी तंत्र में बैठे भ्रष्ट अधिकारी और कारोबारियों की सांठगांठ से जनता का पैसा लूटा जा रहा है। अब सवाल यह है कि – क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में 48 करोड़ का घोटाला
सरकार की जांच रिपोर्ट का सभी को इंतजार है, लेकिन जनता चाहती है कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग में 48 करोड़ का घोटाला



















