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छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा: 11 मांगों पर अड़े कर्मचारी, रायपुर निगम में काली पट्टी बांधकर काम

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा: छत्तीसगढ़ में सरकारी कामकाज की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश के शासकीय कर्मचारी 29 दिसंबर से तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को कलेक्ट्रेट से लेकर अन्य सरकारी विभागों में कुर्सियां खाली नजर आईं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कलेक्ट्रेट में छाया सन्नाटा, निगम में ‘ब्लैक बैंड’ प्रोटेस्ट

छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा: हड़ताल का सबसे ज्यादा असर कलेक्ट्रेट और तहसील कार्यालयों में देखने को मिला, जहां कर्मचारी नदारद रहे। हालांकि, रायपुर नगर निगम के कर्मचारियों ने विरोध का एक अलग तरीका अपनाया। जनता के काम प्रभावित न हों, इसलिए निगम कर्मी काली पट्टी लगाकर काम करते दिखे। ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन’ के आह्वान पर हो रहे इस आंदोलन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

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चुनावी वादे याद दिला रहे कर्मचारी

छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा: आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान सरकार को सत्ता में आए दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन चुनाव के दौरान किए गए वादे अब तक अधूरे हैं। महंगाई भत्ता (DA), नियमितीकरण और वेतन विसंगति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की चुप्पी से कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।

क्या हैं कर्मचारियों की 11 प्रमुख मांगें?

छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा: कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जिसमें वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ शामिल हैं:

  1. महंगाई भत्ता (DA): केंद्र सरकार के समान देय तिथि से एरियर्स के साथ महंगाई भत्ता लागू करना।

  2. एरियर्स का भुगतान: बकाया DA की राशि को कर्मचारियों के GPF खाते में जमा करना।

  3. वेतन विसंगति: लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग के वेतन ढांचे में सुधार और पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करना।

  4. नियमितीकरण: संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अनियमित कर्मचारियों के लिए ठोस स्थायीकरण नीति बनाना।

  5. वेतनमान: 4 स्तरीय समयमान वेतनमान की सुविधा प्रदान करना।

  6. पेंशन और सेवा लाभ: प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर संपूर्ण लाभ देना।

  7. पंचायत सचिवों का शासकीयकरण: लंबे समय से लंबित पंचायत सचिवों की मांग को पूरा करना।

  8. रिटायरमेंट उम्र: सभी विभागों में एकरूपता लाते हुए सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करना।

  9. नगदीकरण: अर्जित अवकाश का नगदीकरण बढ़ाकर 300 दिन करना।

  10. अनुकंपा नियुक्ति: अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में लगी 10% की सीमा (सीलिंग) को हटाना।

  11. कैशलेस सुविधा: प्रदेश के सभी कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू करना।

प्रशासन और जनता पर असर

छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा: तीन दिनों की इस सांकेतिक हड़ताल से राजस्व, शिक्षा और स्थानीय प्रशासन के काम ठप पड़ गए हैं। कर्मचारी फेडरेशन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार इन 11 मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले समय में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

Pooja Chandrakar

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