करवा चौथ की परंपरा: कब, कैसे और कहां से हुई शुरू?

Karwa Chauth 2024: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित पर्व है। यह व्रत पति-पत्नी के बीच प्यार, विश्वास और रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व माना जाता है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस व्रत को निर्जला रखा जाता है और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। करवा चौथ की परंपरा सदियों पुरानी है, और इसके पीछे कई कहानियां जुड़ी हुई हैं। करवा चौथ की परंपरा: कब, कैसे और कहां से हुई शुरू?
करवा चौथ का मतलब क्या है?
‘करवा चौथ’ दो शब्दों से मिलकर बना है—‘करवा’ जिसका अर्थ है ‘मिट्टी का बर्तन’, और ‘चौथ’ यानी ‘चतुर्थी’। इस व्रत में मिट्टी के करवे का विशेष महत्व है, और महिलाएं चौथ माता की पूजा करती हैं। करवा चौथ में करवे का उपयोग पूजा और अर्घ्य देने के लिए किया जाता है। करवा चौथ की परंपरा: कब, कैसे और कहां से हुई शुरू?
करवा चौथ की पौराणिक कहानी
करवा चौथ की शुरुआत को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा के अनुसार, देवताओं और दानवों के बीच युद्ध के दौरान देवता हारने लगे थे। तब ब्रह्मदेव ने देवताओं की पत्नियों से कहा कि वे अपने पतियों की जीत और सुरक्षा के लिए व्रत रखें। देव पत्नियों ने करवा चौथ का व्रत रखा और सच्चे दिल से अपने पतियों की जीत के लिए प्रार्थना की। इसके बाद देवताओं ने युद्ध में विजय प्राप्त की, और तभी चांद निकलने पर व्रत खोला गया। इसी कारण चांद देखकर व्रत खोलने की परंपरा शुरू हुई। करवा चौथ की परंपरा: कब, कैसे और कहां से हुई शुरू?
करवा चौथ की ऐतिहासिक मान्यता
एक अन्य मान्यता के अनुसार, करवा चौथ का व्रत मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पश्चिमी राज्यों जैसे पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में शुरू हुआ। जब मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया था, तब कई राजा अपने राज्य की रक्षा के लिए युद्ध में गए। उनकी पत्नियों ने अपने पतियों की सुरक्षा और दीर्घायु की कामना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखा था। इस परंपरा ने धीरे-धीरे व्यापक रूप से लोकप्रियता हासिल की और आज भी इसे श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। करवा चौथ की परंपरा: कब, कैसे और कहां से हुई शुरू?
करवा चौथ का महत्व
यह व्रत न केवल पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करने वाला होता है, बल्कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण भी बनता है। करवा चौथ का व्रत महिलाओं के प्रेम, समर्पण और त्याग का प्रतीक है, और इसे पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। करवा चौथ की परंपरा: कब, कैसे और कहां से हुई शुरू?



















