
नई दिल्ली। आयुर्वेद, चिकित्सा की प्राचीनतम प्रणाली में से एक है, जो न केवल बीमारियों का इलाज करती है बल्कि इसके कारणों पर भी काम करती है। आयुर्वेद में माना जाता है कि त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का संतुलन शरीर में स्वास्थ्य बनाए रखता है। जब इन दोषों का संतुलन बिगड़ता है, तो विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं। इसी बीच, उपवास (फास्टिंग) आयुर्वेदिक उपचार में एक प्रभावी उपाय साबित होता है, खासकर उन बीमारियों को ठीक करने के लिए जिनमें दोषों का असंतुलन होता है। आयुर्वेद में उपवास: कैसे शरीर के दोषों को संतुलित करता है फास्टिंग?
आयुर्वेद का दृष्टिकोण: रोगों के कारणों पर काम करना
आयुर्वेद शरीर, मन और आत्मा को एक साथ जोड़कर उपचार करता है। इसका मानना है कि शरीर और मन का आपसी संबंध रोगों के कारणों को उत्पन्न करता है। आयुर्वेद के अनुसार, बीमारियाँ मुख्य रूप से दो कारणों से उत्पन्न होती हैं:
- उपचयजन्य बीमारियाँ (जैसे मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, सांस फूलना, बुखार और कैंसर)।
- क्षयजन्य बीमारियाँ, जिनमें शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है।
उपचयजन्य बीमारियों के इलाज के लिए फास्टिंग (उपवास) को प्रभावी माना गया है। जबकि, क्षयजन्य बीमारियों में शरीर को पोषण देने के लिए वृहण चिकित्सा का उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में उपवास: कैसे शरीर के दोषों को संतुलित करता है फास्टिंग?
आयुर्वेद में उपवास का महत्व
डॉ. विकास प्रजापति, जो कलावती आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के पंचकर्मा विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, के अनुसार, उपवास कफ दोष को संतुलित करने में मदद करता है। कफ दोष शरीर में बीमारियों को बढ़ाता है, और फास्टिंग इसे नियंत्रित करने का एक प्रभावी तरीका है। इसके अलावा, फास्टिंग को कैंसर जैसी उपचयजन्य बीमारियों के इलाज में भी लाभकारी माना गया है। आयुर्वेद में उपवास: कैसे शरीर के दोषों को संतुलित करता है फास्टिंग?
फास्टिंग से ये बीमारियाँ कम होती हैं
जब हम उपवास करते हैं, तो शरीर में बढ़े हुए दोष (कफ, पित्त, वात) कम होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप:
- पाचन तंत्र बेहतर काम करता है।
- वजन घटाने में मदद मिलती है।
- सूजन कम होती है।
- मानसिक स्थिति में सुधार आता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
- स्वस्थ्य महसूस होता है, क्योंकि शरीर में गड़बड़ियाँ कम होती हैं। आयुर्वेद में उपवास: कैसे शरीर के दोषों को संतुलित करता है फास्टिंग?
आयुर्वेद में उपवास के विभिन्न तरीके
आयुर्वेद में उपवास के कई तरीके बताए गए हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख तरीके हैं:
- पूर्ण उपवास – इस दौरान आप केवल पानी पीते हैं और बाकी समय कुछ नहीं खाते।
- फल और सब्जियों का जूस – आप पूरे दिन केवल फल और सब्जियों का जूस पी सकते हैं, जिससे शरीर को पोषण मिलता है।
- इंटरमिटेंट फास्टिंग – इसमें आप दिन में केवल 8 घंटे भोजन करते हैं, और बाकी समय पानी पीते हैं। यह तरीका शरीर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखता है। आयुर्वेद में उपवास: कैसे शरीर के दोषों को संतुलित करता है फास्टिंग?



















