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लोक सेवकों की संपत्ति और देनदारियों को सार्वजनिक जांच से बचाया नहीं जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI Act) की धारा 8 का हवाला देते हुए कहा कि लोक सेवकों की संपत्ति और देनदारियों का विवरण व्यक्तिगत जानकारी की श्रेणी में नहीं आता और इसे सार्वजनिक जांच से बचाया नहीं जा सकता। अदालत ने इस संबंध में उचित प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। लोक सेवकों की संपत्ति और देनदारियों को सार्वजनिक जांच से बचाया नहीं जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

मामले का विवरण

यह याचिका एम. तमिलसेल्वन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने राजस्व प्रभागीय अधिकारी, उत्तरी मद्रास के आदेश को चुनौती दी थी। आदेश में कुछ लोक सेवकों के सेवा रजिस्टर से संबंधित जानकारी देने से इनकार किया गया था। लोक सेवकों की संपत्ति और देनदारियों को सार्वजनिक जांच से बचाया नहीं जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

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याचिकाकर्ता की मांग:

  • असिस्टेंट इंजीनियर की आय से अधिक संपत्ति के बारे में जानकारी।
  • पंचायत सचिव के सेवा रजिस्टर से जुड़ी जानकारी।
  • इनकार के कारण के रूप में RTI Act की धारा 8 का हवाला दिया गया। लोक सेवकों की संपत्ति और देनदारियों को सार्वजनिक जांच से बचाया नहीं जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

हाईकोर्ट का फैसला

  1. लोक सेवकों की जवाबदेही:
    न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन ने स्पष्ट किया कि लोक सेवकों की संपत्ति और देनदारियों का विवरण निजी जानकारी नहीं है और इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
  2. उचित प्रतिबंध का निर्देश:
    अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जानकारी के प्रकटीकरण पर उचित प्रतिबंध होना चाहिए।

    • केवल ऐसी जानकारी उजागर की जाए, जो लोक सेवक के करियर को नुकसान न पहुंचाए।
    • सेवा की तारीख, पदोन्नति, और कार्य की प्रकृति का खुलासा किया जा सकता है।
  3. सेवा रजिस्टर की जांच:
    • अदालत ने कहा कि सेवा रजिस्टर में दर्ज सामग्रियों की जांच की जानी चाहिए।
    • यदि जानकारी देने से इनकार किया जाए तो उचित कारण प्रदान करना अनिवार्य है।
  4. पुनर्विचार का आदेश:
    हाईकोर्ट ने विवादित मामले को जिला कलेक्टर को दोबारा विचार करने के लिए वापस भेज दिया।

    • 2 महीने के भीतर कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील का निपटारा करने का निर्देश दिया। लोक सेवकों की संपत्ति और देनदारियों को सार्वजनिक जांच से बचाया नहीं जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट

Nidar Chhattisgarh Desk

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