दुर्ग के किसानों पर दोहरी मार: आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट, सूखने लगीं खरीफ की फसलें

दुर्ग के किसानों पर दोहरी मार: आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट, सूखने लगीं खरीफ की फसलें
Durg Farmer’s Crisis: आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में किसान इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ मानसून की बेरुखी ने खेतों में खड़ी खरीफ फसलों पर संकट ला दिया है, तो दूसरी ओर जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन हैं, वे भयंकर बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं। बुवाई करने के बाद अब किसानों की आंखें आसमान पर टिकी हैं और कान बिजली आने की उम्मीद में लगे हैं।
सूखा आसमान और बिजली कटौती की दोहरी मुसीबत
जून की शुरुआती बारिश ने किसानों के मन में उम्मीद जगाई थी। इसी आस में किसानों ने खेतों की जुताई कर धान की बुवाई कर दी। कई किसानों ने रोपाई के लिए धान की नर्सरी (रोपणी) भी तैयार कर ली है। लेकिन अब, जब फसल को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तो बारिश गायब हो गई है। आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट
जिन किसानों के पास बोरवेल या सिंचाई के अन्य साधन हैं, वे भी परेशान हैं। इलाके में हो रही भारी बिजली कटौती और लो-वोल्टेज के कारण सिंचाई पंप नहीं चल पा रहे हैं। इससे किसानों की लागत और मेहनत दोनों बर्बाद होने का खतरा मंडरा रहा है। आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट
किसानों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
बिजली की समस्या से तंग आकर धमधा ब्लॉक के ननकट्ठी और बोडेगांव के किसानों ने जनदर्शन में कलेक्टर से गुहार लगाई है। उन्होंने बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या बताते हुए मांग की है कि उनके इलाके में लगे 25 एचपी के ट्रांसफार्मर की क्षमता को बढ़ाकर 63 एचपी किया जाए, ताकि सिंचाई का काम सुचारू रूप से चल सके। आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट
उर्वरक का संकट: DAP की कमी, विकल्प मौजूद
बारिश और बिजली के साथ-साथ किसान उर्वरक की कमी से भी जूझ रहे हैं। जिले में डीएपी (DAP) खाद की भारी किल्लत है। कृषि विभाग के अनुसार, वैश्विक कारणों से इस साल डीएपी का आवंटन लक्ष्य से कम हुआ है। हालांकि, विभाग किसानों को डीएपी की जगह अन्य वैकल्पिक उर्वरकों जैसे सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और NPK (12:32:16) का उपयोग करने की सलाह दे रहा है, जिनका पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट
जिले में उर्वरकों की वर्तमान स्थिति (मीट्रिक टन में)
| उर्वरक | कुल भंडारण | अब तक वितरण | शेष स्टॉक |
| यूरिया | 20,642 | 16,862 | 3,194 |
| डी.ए.पी. | 6,744 | 6,293 | 444 |
| सिंगल सुपर फॉस्फेट | 14,223 | 8,193 | 2,296 |
| पोटाश | 5,283 | 3,815 | 1,131 |
| NPK (12:32:16) | 978 | 371 | 607 |
कैसा है जिले में बारिश का हाल?
भू-अभिलेख कार्यालय के अनुसार, 1 जून से 30 जून तक जिले में औसत 103.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
सर्वाधिक बारिश: पाटन तहसील में (207.0 मिमी)
न्यूनतम बारिश: धमधा तहसील में (65.9 मिमी)
यह आंकड़ा दिखाता है कि जिले के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण बहुत असमान है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। अन्नदाता अब केवल इंद्रदेव की कृपा और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। आसमान से बारिश गायब, जमीन पर बिजली कटौती का संकट



















