कबीरधाम में खूनी रफ्तार: 5 दिन में 5 मौतें, किसी ने खोया बेटा तो किसी ने भाई, परिवारों में पसरा मातम
Road Accident: सड़क किनारे खड़े ट्रेलर और तेज रफ्तार वाहनों ने ली जान, एनएच-30 बना 'डेथ जोन', प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग।

कबीरधाम: कबीरधाम में खूनी रफ्तार: 5 दिन में 5 मौतें, किसी ने खोया बेटा तो किसी ने भाई, परिवारों में पसरा मातम. कबीरधाम जिले की सड़कें पिछले पांच दिनों से खून से रंगी हुई हैं। यहां सड़क हादसे अब महज दुर्घटनाएं नहीं रहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म बन चुकी हैं। बीते 5 दिनों में हुए अलग-अलग भीषण हादसों में 5 लोगों की जान चली गई है। किसी घर का इकलौता चिराग बुझ गया, तो कहीं दो सगे भाइयों की अर्थियां एक साथ उठीं। इन घटनाओं ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
बुजुर्ग मां का इकलौता सहारा छिना
सबसे ताजा और हृदयविदारक घटना संदीप नाम के युवक के साथ घटी। संदीप अपनी बाइक से जा रहे थे, तभी सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर के लोहे के हिस्से से उनका सिर टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि संदीप की मौके पर ही मौत हो गई।
यह हादसा सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की बर्बादी है। संदीप अपनी वृद्ध मां का इकलौता सहारा थे। उनके जाने से मां बेसहारा हो गई हैं, वहीं उनके दो बेटे और एक बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।कबीरधाम में खूनी रफ्तार: 5 दिन में 5 मौतें, किसी ने खोया बेटा तो किसी ने भाई, परिवारों में पसरा मातम
दो सगे भाइयों की एक साथ मौत
एनएच-30 बोड़ला पर 16 नवंबर की रात हुए हादसे ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। ग्राम बैहरसरी निवासी दो सगे भाई— राजेश्वर वर्मा (42) और प्रदीप वर्मा (25) बाइक से घर लौट रहे थे। रात करीब 9.40 बजे सिद्धि विनायक होटल के पास पोंडी की तरफ से आ रहे एक अज्ञात वाहन ने उन्हें रौंद दिया।
डायल-112 की टीम ने दोनों को गंभीर हालत में बोड़ला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने दोनों भाइयों को मृत घोषित कर दिया। एक ही घर से दो अर्थियां उठने से गांव में मातम का माहौल है।कबीरधाम में खूनी रफ्तार: 5 दिन में 5 मौतें, किसी ने खोया बेटा तो किसी ने भाई, परिवारों में पसरा मातम
ड्यूटी से लौट रहे पटवारी की गई जान
इससे पहले 15-16 नवंबर की दरमियानी रात भी एक शासकीय कर्मचारी की जान चली गई। पटवारी उत्तम सिंह प्रोटोकॉल ड्यूटी पूरी कर वापस लौट रहे थे। चिल्फी घाटी क्षेत्र में घुप अंधेरा और सड़क पर फिसलन होने के कारण उनकी बाइक अनियंत्रित होकर सीधे नाले में जा गिरी। इस हादसे में उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। सहकर्मियों और परिजनों ने इसे अपूरणीय क्षति बताया है।कबीरधाम में खूनी रफ्तार: 5 दिन में 5 मौतें, किसी ने खोया बेटा तो किसी ने भाई, परिवारों में पसरा मातम
बिना इंडिकेटर खड़े ट्रेलर ने ली कंडक्टर की जान
लापरवाही की हद तब देखने को मिली जब 16 नवंबर की सुबह 5 बजे एनएच-30 हीरापुर के पास दुबे ढाबा के करीब एक और हादसा हुआ। बेरला से टमाटर लेने जा रहे एक आईचर वाहन के चालक सोहिल खान को अंधेरे में सड़क किनारे खड़ा ट्रेलर दिखाई नहीं दिया। ट्रेलर बिना किसी पार्किंग लाइट या सुरक्षा संकेत के खड़ा था।
आईचर वाहन पीछे से ट्रेलर में जा घुसा। इस भिड़ंत में कंडक्टर इशाक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चालक सोहिल गंभीर रूप से घायल हैं और जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।कबीरधाम में खूनी रफ्तार: 5 दिन में 5 मौतें, किसी ने खोया बेटा तो किसी ने भाई, परिवारों में पसरा मातम
एनएच-30 बना ‘डेथ जोन’, लोगों में आक्रोश
लगातार हो रही मौतों से नेशनल हाइवे-30 के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में भय और गुस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े भारी वाहन और बिना रोक-टोक के दौड़ती तेज रफ्तार गाड़ियां इन हादसों की मुख्य वजह हैं।कबीरधाम में खूनी रफ्तार: 5 दिन में 5 मौतें, किसी ने खोया बेटा तो किसी ने भाई, परिवारों में पसरा मातम
प्रमुख समस्याएं: सड़कों पर रोशनी की कमी, पुलिस गश्त का अभाव और खतरनाक पार्किंग।
मांग: रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि हाईवे पर गश्त बढ़ाई जाए और सड़क किनारे जानलेवा तरीके से खड़े वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि किसी और घर का चिराग बुझने से बचाया जा सके।



















