सुकमा में उम्मीदों की नई रोशनी: अंदरूनी इलाकों के मरीजों का फ्री मोतियाबिंद ऑपरेशन, रहने-खाने और घर छोड़ने की सुविधा भी मुफ्त
जिला प्रशासन की अनूठी पहल: 'नियद नेल्ला नार' अभियान के तहत 600 से ज्यादा नए मरीजों की पहचान, स्कूली बच्चों को भी मिलेंगे फ्री चश्मे।

सुकमा:
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की एक पहल वनांचल के लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। जिले के दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को अब मोतियाबिंद के इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। जिला अस्पताल सुकमा में न केवल उनका निःशुल्क ऑपरेशन किया जा रहा है, बल्कि उन्हें घर से लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी भी प्रशासन उठा रहा है।
वीआईपी सुविधाओं जैसा इलाज, वह भी बिल्कुल मुफ्त
अक्सर ग्रामीण इलाकों के लोग संसाधनों की कमी या जानकारी के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पाते। इस समस्या को दूर करने के लिए सुकमा जिला प्रशासन ने पूरी व्यवस्था अपने हाथ में ली है।अंदरूनी इलाकों के मरीजों का फ्री मोतियाबिंद ऑपरेशन, रहने-खाने और घर छोड़ने की सुविधा भी मुफ्त
ट्रांसपोर्ट: मरीजों को उनके गांव से अस्पताल लाने और ऑपरेशन के बाद सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए वाहन सुविधा दी जा रही है।
आवास और भोजन: अस्पताल में भर्ती मरीजों, उनके साथ आने वाले परिजनों (अटेंडर) और मितानिनों के लिए ठहरने और भोजन की पूरी व्यवस्था निःशुल्क है।
आंकड़े बता रहे सफलता की कहानी
जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 के बीच यह अभियान काफी सफल रहा है।
93 मरीजों की दोनों आंखों का सफल ऑपरेशन किया गया।
129 मरीजों की एक आंख का ऑपरेशन कर उन्हें दृष्टि प्रदान की गई।
इसके अलावा, स्कूलों में भी विशेष नेत्र परीक्षण अभियान चलाया गया। जांच में 439 छात्र-छात्राओं में दृष्टि दोष पाया गया, जिन्हें प्रशासन जल्द ही मुफ्त चश्मे उपलब्ध कराएगा। वहीं, 40 वर्ष से अधिक उम्र के 197 लोगों को पढ़ने के लिए निःशुल्क चश्मे (प्रेसबायोपिक) दिए गए हैं।अंदरूनी इलाकों के मरीजों का फ्री मोतियाबिंद ऑपरेशन, रहने-खाने और घर छोड़ने की सुविधा भी मुफ्त
नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुंचा ‘नियद नेल्ला नार’ अभियान
विकासखंड कोंटा के बेहद संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत 24 सितंबर 2025 से 01 अक्टूबर 2025 तक एक व्यापक नेत्र सुरक्षा कार्यक्रम चलाया गया।अंदरूनी इलाकों के मरीजों का फ्री मोतियाबिंद ऑपरेशन, रहने-खाने और घर छोड़ने की सुविधा भी मुफ्त
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सिलगेर, जगरगुंडा, टेकलगुड़ा, बुर्कापाल, चिंतागुफा और किस्टाराम जैसे दर्जनों गांवों में घर-घर जाकर सर्वे किया। इस सर्वे के चौंकाने वाले और सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:
सर्वे में 492 मरीज ऐसे मिले जिनकी दोनों आंखों में मोतियाबिंद है।
132 मरीज एक आंख के मोतियाबिंद से ग्रसित पाए गए।
प्रशासन ने जानकारी दी है कि इन सभी चिन्हित मरीजों को जल्द ही जिला अस्पताल लाकर उनका ऑपरेशन कराया जाएगा।
प्रशासन का संकल्प: हर आंख तक पहुंचे रोशनी
जिला प्रशासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि सुकमा के अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। दूरस्थ वनांचलों में लगातार सर्वेक्षण और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पैसे या दूरी की वजह से कोई भी ग्रामीण अंधेरे में जीने को मजबूर न होअंदरूनी इलाकों के मरीजों का फ्री मोतियाबिंद ऑपरेशन, रहने-खाने और घर छोड़ने की सुविधा भी मुफ्त



















