Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में! कभी गोलियों की गूंज थी, अब ट्रैकिंग करेंगे सैलानी; जानिए डोंगरगढ़ का नया प्लान

Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में! कभी गोलियों की गूंज थी, अब ट्रैकिंग करेंगे सैलानी; जानिए डोंगरगढ़ का नया प्लान. कभी नक्सलियों की दहशत के लिए जाना जाने वाला इलाका अब पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो रहा है। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ के जंगलों को हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। जानिए क्या है वन विभाग का यह ड्रीम प्रोजेक्ट।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आ रही है। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित दक्षिण बोरतलाव के जंगल, जो कभी नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माने जाते थे, अब अपनी पहचान बदलने जा रहे हैं। जिस इलाके में कभी दर्रेकसा और नक्सली प्लाटून नंबर-1 की धमक थी, वहां अब डर की जगह एडवेंचर और रोमांच गूंजेगा। पुलिस और प्रशासन की मेहनत से यह क्षेत्र अब पूरी तरह सुरक्षित हो चुका है और इसे प्रदेश के पहले ‘सेफ जंगल ट्रैकिंग जोन’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है।Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में!
हिमाचल प्रदेश जैसा अनुभव अब घर के पास
वन विभाग ने एक महत्वकांक्षी योजना तैयार की है, जिसके तहत ढारा डेम (Dhara Dam) से लेकर बोरतलाव वन परिक्षेत्र तक एक शानदार ट्रैकिंग रूट बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य पर्यटकों को हिमाचल प्रदेश जैसा ट्रैकिंग अनुभव देना है। प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही यहां सैलानी घने जंगलों के बीच पैदल चलने का लुत्फ उठा सकेंगे। यह सिर्फ एक सैर नहीं, बल्कि कुदरत को करीब से महसूस करने का मौका होगा।Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में!
तेंदुआ, बारहसिंगा और वन भैंसे का दीदार
इस ट्रैकिंग रूट का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का वन्य जीवन होगा। घने जंगलों के बीच से गुजरते हुए पर्यटकों को दुर्लभ वन्य जीवों को करीब से देखने का मौका मिलेगा।Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में!
वन्य जीव: बारहसिंगा, नीलगाय, हिरण, लकड़बग्घा, जंगली सुअर और वन भैंसा।
रोमांच: किस्मत अच्छी रही तो तेंदुए (Leopard) की झलक भी देखने को मिल सकती है।
सुरक्षा के लिए साथ रहेंगे एक्सपर्ट गाइड
जंगल के बीच पर्यटकों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होगी। वन विभाग और वन प्रबंधन समिति के प्रशिक्षित कर्मचारी ‘एक्सपर्ट गाइड’ के रूप में पर्यटकों के साथ चलेंगे। वे न केवल रास्ता दिखाएंगे बल्कि जंगल के नियमों और सुरक्षा का भी ध्यान रखेंगे।Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में!
सेहत और ज्ञान का खजाना भी
यह ट्रैकिंग सिर्फ एडवेंचर तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह ज्ञानवर्धक भी होगी। ट्रैकिंग के दौरान गाइड पर्यटकों को जंगल की वनस्पति से रूबरू कराएंगे।Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में!
इमारती लकड़ियां: सागौन, साजा, शीशम और बीजा जैसे पेड़ों की पहचान कराई जाएगी।
औषधीय पौधे: हल्दी, चिरायता, आंवला और महुआ जैसे गुणकारी पौधों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा, ढारा डेम, डंगोरा डेम और नीगो बांध जैसे सुंदर जलाशयों को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि थकान मिटाने के लिए पर्यटक यहां सुकून के पल बिता सकें।Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में!
अधिकारियों का क्या कहना है?
राजनांदगांव के डीएफओ (DFO) आयुष जैन ने बताया कि डोंगरगढ़ का यह पहला जंगल ट्रैकिंग प्रोजेक्ट पूरी तरह से सुरक्षित होगा। इसके लिए विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा और जल्द ही छत्तीसगढ़ पर्यटन के नक्शे पर एक नया सितारा जुड़ जाएगा।Chhattisgarh Tourism: हिमाचल जैसी फीलिंग अब छत्तीसगढ़ में!



















