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जशपुर

कुनकुरी महागिरजाघर में क्रिसमस की धूम: एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब

कुनकुरी महागिरजाघर में क्रिसमस की धूम: एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब, छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च, ‘कुनकुरी महागिरजाघर’ में क्रिसमस का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। प्रभु यीशु के जन्मोत्सव के अवसर पर हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँच रहे हैं। विशेष प्रार्थना सभाओं और पारंपरिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है।

मिस्सा पूजा और ‘चुमावन’ की अनोखी परंपरा

क्रिसमस की पूर्व संध्या से ही कुनकुरी में उत्सव का माहौल देखने को मिला। बुधवार रात को आयोजित विशेष मिस्सा पूजा में हज़ारों मसीही समाज के लोग शामिल हुए। बिशप एमानुएल केरकेट्टा के सानिध्य में मध्यरात्रि ठीक 12 बजे प्रभु यीशु के जन्म का अनुष्ठान संपन्न हुआ। इसके बाद बालक यीशु को चरनी से निकालकर ‘चुमावन’ की पारंपरिक रस्म निभाई गई, जो यहाँ की एक विशिष्ट संस्कृति का हिस्सा है।एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब

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कुनकुरी चर्च का गौरवशाली इतिहास और वास्तुकला

जशपुर का यह महागिरजाघर न केवल धार्मिक बल्कि स्थापत्य कला का भी एक अद्भुत केंद्र है। इस भव्य ढांचे की नींव वर्ष 1962 में तत्कालीन बिशप स्टानिसलास लकड़ा के नेतृत्व में रखी गई थी। बेल्जियम के प्रसिद्ध वास्तुकार कार्डिनल जेएम कार्सि एसजे के मार्गदर्शन में तैयार इस चर्च को बनने में लगभग 17 साल का लंबा समय लगा था।एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब

वास्तुकला में छिपा है गहरा अर्थ: 7 छत और 7 दरवाजे

इस गिरजाघर की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा डिजाइन है। यह विशाल भवन एक ही बीम के सहारे खड़ा है। चर्च में सात छतें और सात प्रवेश द्वार बनाए गए हैं, जो ईसाई धर्म के ‘सात संस्कारों’ का प्रतीक माने जाते हैं। इसकी भव्यता को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु यहाँ खिंचे चले आते हैं।एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब

आदिवासी संस्कृति और लोक नृत्य का संगम

क्रिसमस के दौरान कुनकुरी का नजारा बेहद मनमोहक होता है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आए आदिवासी समुदाय के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में मांदर की थाप पर थिरकते नजर आते हैं। आधुनिकता और परंपरा का यह मेल इस उत्सव को और भी खास बना देता है। हालांकि मुख्य भवन में बैठने की क्षमता 10,000 के करीब है, लेकिन क्रिसमस के दौरान यहाँ लाखों की भीड़ जुटती है।एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब

सजावट और उत्साह का माहौल

एक सप्ताह पहले से ही पूरा परिसर रोशनी और फूलों से जगमगा उठा था। गिरजाघर के अंदर और बाहर बनाई गई आकर्षक चरनी (Crib) और रंग-बिरंगी लाइटें लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्वक दर्शन कर सकें।एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च में उमड़ा आस्था का सैलाब

Pooja Chandrakar

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