Raghunathnagar Forest News: प्रभारी रेंजर पर रिश्वत और फर्जी FIR के आरोप, ग्रामीणों ने IG से की शिकायत; जानें पूरा मामला

Raghunathnagar Forest News: जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र (Forest Range) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के ग्राम पण्डरी के ग्रामीणों ने प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर (Shivnath Thakur) पर भ्रष्टाचार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर साहब रिश्वत के लिए सारी हदें पार कर चुके हैं और अब बात मारपीट और फर्जी पुलिस केस तक पहुँच गई है।
क्या है पूरा विवाद? (The Main Controversy)
Raghunathnagar Forest News:मामले की शुरुआत तब हुई जब रघुनाथनगर वन विभाग ने हाल ही में 43 लोगों को अतिक्रमण (Encroachment) हटाने का नोटिस जारी किया। नोटिस में ग्रामीणों को 3 दिनों के भीतर जमीन के वैध दस्तावेज (Valid Documents) दिखाने को कहा गया था।
Raghunathnagar Forest News:लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि रेंजर शिवनाथ ठाकुर इस नोटिस की आड़ में अपना ‘निजी स्वार्थ’ साध रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, रेंजर ने उनसे रिश्वत की मांग की और पैसे न देने पर जेल भेजने की धमकी दी।
मारपीट और बदसलूकी के आरोप (Allegations of Assault)
Raghunathnagar Forest News:ग्रामीणों ने शिकायत में बताया कि घटना के दिन वन विभाग की टीम गाँव पहुँची और वहां मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मारपीट की। वन कर्मियों ने उन्हें जबरन गाड़ी में बिठाने की कोशिश की, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सबको हैरान कर दिया।
फर्जी FIR का ‘खेल’? (The Fake FIR Angle)
Raghunathnagar Forest News:ग्रामीणों का दावा है कि उनके खिलाफ थाने में एक बेबुनियाद और फर्जी FIR दर्ज कराई गई है। वन विभाग के कर्मचारी पीयूष पटेल ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की और उनकी वर्दी फाड़ दी।
ग्रामीणों का तर्क:
घटना के समय पीयूष पटेल वर्दी (Uniform) में थे ही नहीं।
जब वर्दी पहनी ही नहीं थी, तो फटने का सवाल ही नहीं उठता।
यह पूरी तरह से ग्रामीणों को डराने के लिए रचा गया एक मनगढ़ंत मामला है।
IG और मुख्य वन संरक्षक से शिकायत (Complaint to IG Surguja)
Raghunathnagar Forest News:इस उत्पीड़न से परेशान होकर ग्रामीणों ने सरगुजा रेंज के IG (Forest) और मुख्य वन संरक्षक को लिखित शिकायत सौंपी है। ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण की High-level Investigation (उच्च स्तरीय जांच) की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन (Protest) करने के लिए मजबूर होंगे।



















