धमतरी का अनोखा गांव ‘सेमरा’: जहां देश से एक सप्ताह पहले ही सज जाता है होली का गुलाल

छत्तीसगढ़ धमतरी का अनोखा गांव ‘सेमरा’: जहां देश से एक सप्ताह पहले ही सज जाता है होली का गुलाल, के धमतरी जिले में स्थित एक छोटा सा गांव ‘सेमरा (सी)’ अपनी अनूठी परंपरा के लिए देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जब पूरा देश होली की तैयारियों में जुटा होता है, तब इस गांव में फाग गीतों की गूंज और गुलाल की मस्ती शुरू हो जाती है। यहां की सदियों पुरानी रीत के अनुसार, मुख्य तिथि से ठीक सात दिन पहले ही होली का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है।
आज होगा होलिका दहन, कल उड़ेगा अबीर-गुलाल
धमतरी का अनोखा गांव ‘सेमरा’: परंपरा के अनुसार, आज गांव में पूरे विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया जाएगा। इसके ठीक अगले दिन यानी बुधवार को पूरा गांव रंगों के उत्सव में सराबोर रहेगा। ग्रामीण एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर फाग गीतों की धुन पर थिरकेंगे। सेमरा की यह होली केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि समय की परिधि को लांघकर इतिहास रचने जैसी है।
सिरदार देव का आदेश: क्यों सात दिन पहले मनाया जाता है त्यौहार?
धमतरी का अनोखा गांव ‘सेमरा’: इस रहस्यमयी परंपरा के पीछे गहरी आस्था जुड़ी है। ग्रामीणों का मानना है कि गांव के आराध्य ‘सिरदार देव’ ने पूर्वजों को स्वप्न में दर्शन देकर यह आदेश दिया था। उन्होंने गांव को प्राकृतिक आपदाओं, महामारियों और किसी भी अनहोनी से बचाने के लिए सभी प्रमुख त्यौहार निर्धारित समय से एक सप्ताह पूर्व मनाने का निर्देश दिया था। तब से आज तक, पीढ़ी दर पीढ़ी इस अलिखित नियम का पालन पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है।
आस्था और डर का अनोखा संगम
धमतरी का अनोखा गांव ‘सेमरा’: गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा महज एक रिवाज नहीं, बल्कि अटूट विश्वास है। अतीत में कुछ लोगों ने मुख्य तिथि पर त्यौहार मनाने की कोशिश की थी, लेकिन कहा जाता है कि उसके बाद गांव में बीमारियां और अकाल जैसी स्थितियां पैदा हो गई थीं। इसी डर और अटूट श्रद्धा के कारण आज की आधुनिक पीढ़ी भी इस प्राचीन रीत को बदलने का साहस नहीं करती।
लोक संस्कृति और सामाजिक मेल-मिलाप
धमतरी का अनोखा गांव ‘सेमरा’: इस विशेष अवसर पर गांव का माहौल उत्सवपूर्ण हो जाता है। गांव की विवाहित बेटियां खास तौर पर इस समय अपने मायके आती हैं। पूरे क्षेत्र में खुशियों का माहौल रहता है और सामूहिक भोज के साथ फाग गीतों की महफिल सजती है। सेमरा गांव की यह अनूठी रीत छत्तीसगढ़ की समृद्ध और विविध लोक संस्कृति का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।



















