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बालोद

उम्र नहीं बनी रुकावट: बालोद के 2919 बुजुर्ग बने साक्षर

उम्र नहीं बनी रुकावट: बालोद के 2919 बुजुर्ग बने साक्षर, छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां उम्र के अंतिम पड़ाव पर भी बुजुर्गों ने शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया। जिले के 2919 वरिष्ठ नागरिकों ने साक्षरता परीक्षा पास कर यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

 उल्लास साक्षरता अभियान से मिली नई पहचान

उम्र नहीं बनी रुकावट:शासन द्वारा चलाए जा रहे उल्लास साक्षरता कार्यक्रम के तहत निरक्षर लोगों को शिक्षित करने का अभियान जारी है।

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  • दो साल पहले जिन लोगों ने परीक्षा दी थी, उन्हें दोबारा तैयारी का मौका दिया गया
  • नियमित पढ़ाई और अभ्यास के बाद परीक्षा आयोजित की गई
  • इस बार बड़ी संख्या में बुजुर्गों ने भाग लेकर सफलता हासिल की

अब ये बुजुर्ग न केवल पढ़ना सीख चुके हैं, बल्कि अपना नाम लिखने में भी सक्षम हो गए हैं

 महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा

उम्र नहीं बनी रुकावट:इस अभियान में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:

  • कुल परीक्षार्थी: 2919
  • महिलाएं: 2349
  • पुरुष: 577

यह आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं शिक्षा के प्रति तेजी से जागरूक हो रही हैं।

रिश्तों के साथ परीक्षा का उत्साह

उम्र नहीं बनी रुकावट:इस साक्षरता परीक्षा में कई दिलचस्प नज़ारे देखने को मिले:

  • सास-बहू ने साथ में परीक्षा दी
  • देवरानी-जेठानी ने मिलकर हिस्सा लिया
  • कई जगह पति-पत्नी ने एक साथ परीक्षा देकर प्रेरणा दी

गुंडरदेही ब्लॉक के पाउवारा गांव में एक दंपति ने साथ परीक्षा देकर उदाहरण पेश किया।

जिले में अब भी हजारों निरक्षर

बालोद जिले में अभी भी 6 हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते।

  • इनकी पहचान के लिए सर्वे किया गया
  • पढ़ाई कराकर उन्हें परीक्षा के लिए तैयार किया गया
  • आगे भी ऐसे अभियान जारी रहने की योजना है

 प्रतिभागियों ने साझा किया अनुभव

पाउवारा गांव के एक दंपति ने बताया:

“पहले हमें पढ़ना-लिखना नहीं आता था, लेकिन अब हम अपना नाम लिख लेते हैं। यह अभियान हमारे लिए बहुत उपयोगी साबित हुआ।”

 शिक्षा से बदल रही जिंदगी

यह पहल न सिर्फ साक्षरता बढ़ा रही है, बल्कि बुजुर्गों को आत्मनिर्भर भी बना रही है।
अब वे बैंक, दस्तावेज़ और दैनिक कामों में खुद सक्षम हो रहे हैं।

उम्र नहीं बनी रुकावट:बालोद का यह साक्षरता अभियान समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह दिखाता है कि अगर इच्छा और अवसर मिले, तो किसी भी उम्र में शिक्षा हासिल की जा सकती है।

Pooja Chandrakar

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