जंगल के बीच शिक्षा की जंग: झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर मासूम बच्चे

जंगल के बीच शिक्षा की जंग: झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर मासूम बच्चे, छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अंतर्गत सिहावा विधानसभा क्षेत्र के वनांचल इलाके में बसे ग्राम गाताबहारा की तस्वीर आज भी विकास के दावों को आईना दिखा रही है। यहां आज़ादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी नन्हे बच्चे बुनियादी शिक्षा सुविधाओं से वंचित हैं।
पक्का स्कूल नहीं, झोपड़ी बना कक्षा
जंगल के बीच शिक्षा की जंग:ग्राम पंचायत खल्लारी के आश्रित गांव गाताबहारा में प्राथमिक शाला का पक्का भवन आज तक नहीं बन पाया है। मजबूरी में बच्चे लकड़ी के खंभों पर खड़ी अस्थायी झोपड़ी में पढ़ाई कर रहे हैं, जिसके ऊपर सिर्फ प्लास्टिक की शीट डाली गई है।
गर्मी-बारिश में ठप हो जाती है पढ़ाई
जंगल के बीच शिक्षा की जंग:यह अस्थायी ढांचा न तो तेज धूप से बचाव कर पाता है और न ही बारिश में सुरक्षा देता है। गर्मी में बच्चों को सीधी धूप झेलनी पड़ती है, जिससे स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। वहीं बरसात के दिनों में स्कूल की पढ़ाई लगभग बंद हो जाती है। इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा, मानसिक विकास और भविष्य पर पड़ रहा है।
जंगल का डर: पढ़ाई के साथ जान का जोखिम
जंगल के बीच शिक्षा की जंग:घना वन क्षेत्र होने के कारण गांव में जंगली जानवरों की आवाजाही आम है। हाल ही में एक दर्दनाक घटना में गांव के एक मासूम बच्चे को जंगली जानवर उठा ले गया था, जिसकी लाश बाद में जंगल में मिली। ऐसे हालात में खुले और असुरक्षित स्थान पर बच्चों की पढ़ाई होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
जंगल के बीच शिक्षा की जंग:गाताबहारा गांव आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है—
अब तक गांव में बिजली नहीं पहुंची
बच्चे रात में चिमनी या दीये की रोशनी में पढ़ते हैं
गांव तक न पक्की सड़क है, न पुल-पुलिया
स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक चिकित्सा सुविधा पूरी तरह नदारद
किसी भी बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का दर्द: आज भी आदिम जीवन जीने को मजबूर
जंगल के बीच शिक्षा की जंग:स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यहां कोई सुध लेने वाला नहीं है। चुनाव के समय नेता आते हैं, वादे करते हैं और फिर गांव को भूल जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार आज भी उनका जीवन आदिकाल जैसी परिस्थितियों में गुजर रहा है।
प्रशासन से ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
जंगल के बीच शिक्षा की जंग:ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द निम्न मांगें पूरी करने की अपील की है—
प्राथमिक स्कूल के लिए पक्का भवन निर्माण
गांव में बिजली और सड़क सुविधा
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या मोबाइल मेडिकल यूनिट
जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम
बच्चों के भविष्य पर मंडराता संकट
जंगल के बीच शिक्षा की जंग:गाताबहारा की यह स्थिति शिक्षा के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है। यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ गंभीर अन्याय भी है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस संवेदनशील मुद्दे पर कब ठोस कदम उठाते हैं।



















