कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा! गरीब परिवारों और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर उठे गंभीर सवाल
पीडीएस, आंगनबाड़ी और स्कूलों में इल्लियां-फफूंद लगा चावल, राइस मिलर्स, क्वालिटी इंस्पेक्टर और नान की भूमिका पर जांच की मांग

कोरबा/पाली: कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा! गरीब परिवारों और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर उठे गंभीर सवाल. कोरबा जिले के पाली विकासखंड में बीते 2-3 महीनों से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत वितरित किए जा रहे चावल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गरीब परिवारों को घटिया, अमानक और अत्यधिक टूटा हुआ (कनकी) चावल मिल रहा है, जिसमें कंकड़-पत्थर भी पाए जा रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि यही घटिया चावल आंगनबाड़ियों के नौनिहालों और स्कूलों में बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए भी भेजा जा रहा है, जिसमें इल्लियां और फफूंद लगी हुई मिल रही हैं।
गरीबों की थाली से खिलवाड़
बताया जा रहा है कि पीडीएस दुकानों से मिल रहा यह चावल इतना खराब है कि मवेशी भी इसे खाने से कतरा रहे हैं, लेकिन गरीब परिवार इसे साफ करके खाने को मजबूर हैं। कई उपभोक्ता इस खराब गुणवत्ता वाले चावल को दुकानों पर बेचकर महंगे दामों पर दूसरा चावल खरीदने को विवश हैं। यह स्थिति शासन की जनकल्याणकारी निःशुल्क खाद्यान्न योजना के उद्देश्य पर सीधा प्रहार है।कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा!
बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा
सबसे alarming बात यह है कि आंगनबाड़ियों और स्कूलों में भी इसी तरह का इल्लियां-फफूंद लगा चावल पहुंच रहा है। बच्चों के मध्याह्न भोजन में ऐसे चावल का उपयोग उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। जानकारी के अनुसार, पिछले 2-3 महीनों से लगातार इसी तरह का खराब चावल दिया जा रहा है और शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा!
मिलीभगत और कमीशनखोरी के आरोप
इस पूरे मामले में राइस मिलर्स, क्वालिटी इंस्पेक्टर और नागरिक आपूर्ति निगम (नान) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मिलीभगत और कमीशनखोरी के चलते गुणवत्ता जांच को नजरअंदाज किया जा रहा है। चावल की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी क्वालिटी इंस्पेक्टर की होती है, लेकिन यहां न तो उचित जांच हो रही है और न ही किसी तरह की मॉनिटरिंग।कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा!
सिस्टम पर उठते ज्वलंत सवाल
यह पूरा प्रकरण न केवल शासकीय योजनाओं में भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि आम जनता और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर धोखाधड़ी है। यदि शासन की ओर से ईमानदारी से गुणवत्ता परख की जाए तो कमीशन के इस खेल पर अंकुश लग सकता है और गरीबों को उनके हक का सही चावल मिल पाएगा।कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा!
जांच और सुधार की तत्काल आवश्यकता
इस गंभीर मामले में तत्काल उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चावल आपूर्ति प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि शासन की महत्वाकांक्षी खाद्यान्न योजना का लाभ सही मायने में जरूरतमंदों तक पहुंच सके और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा!
सरकार से अपील है कि इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए कठोर कदम उठाए, ताकि बच्चों और गरीब परिवारों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बंद हो सके।कोरबा में घटिया चावल आपूर्ति पर बड़ा खुलासा!



















