
बिलासपुर में उत्तर प्रदेश से ट्रेन के जरिए नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले मुख्य आरोपी समेत पिता और रिश्तेदार गिरफ्तार। 20 लाख की प्रतिबंधित गोलियां बरामद।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में नशे के अवैध कारोबार को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश में नौकरी की तलाश में गया एक युवक वहां से लौटने के बाद प्रतिबंधित नशीली दवाओं का बड़ा तस्कर बन गया। इस गैरकानूनी कारोबार में उसने अपने ही परिवार और रिश्तेदारों को भी शामिल कर लिया था। पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए आरोपियों के घर से लाखों रुपए कीमत की प्रतिबंधित गोलियां बरामद की हैं और तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

सीपत थाना क्षेत्र में पुलिस की दबिश
यह पूरा मामला बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र के अंतर्गत सामने आया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की टीम को पुख्ता सूचना मिली थी कि ग्राम गुड़ी के लोनिया पारा निवासी एक युवक अपने घर में भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली दवाएं छिपाकर बेच रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध के घर पर औचक दबिश दी।
तलाशी के दौरान पुलिस ने घर के अंदर बैग में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में प्रतिबंधित टैबलेट्स बरामद कीं। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में सनसनी फैल गई।

बरामदगी और आरोपियों से जुड़े मुख्य तथ्य
पुलिस की छापेमारी में बरामद नशीली दवाओं और आरोपियों से जुड़े प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
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बरामद दवाएं: प्रॉक्सिको स्पास और अल्प्राविन टैबलेट्स।
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कुल मात्रा: लगभग 2.5 किलोग्राम वजन की कुल 4,750 प्रतिबंधित नशीली गोलियां।
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कुल कीमत: जब्त की गई दवाओं की अनुमानित बाजार कीमत करीब 20 लाख रुपए आंकी गई है।
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गिरफ्तार आरोपी: मुख्य आरोपी मुकेश लोनिया (20 वर्ष), उसके पिता उग्रसेन लोनिया (60 वर्ष) और रिश्तेदार परमेश्वर लोनिया उर्फ कोंदा (20 वर्ष)।
यूपी कनेक्शन और काम करने का तरीका
पुलिस पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी मुकेश कुछ समय पहले मजदूरी के सिलसिले में उत्तर प्रदेश गया था। वहीं पर उसकी मुलाकात नशे के धंधे से जुड़े आपराधिक तत्वों से हुई। संपर्क बढ़ने के बाद उसने वापस लौटकर अपने घर पर ही यह अवैध धंधा शुरू कर दिया। इस काम में उसने अपने 60 वर्षीय पिता उग्रसेन और रिश्तेदार परमेश्वर को भी साझीदार बना लिया।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह खेप ट्रेन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मथुरा से मंगाई गई थी। पुलिस अब मथुरा के मुख्य तस्करों की तलाश कर रही है और इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के अन्य नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
पुराना आपराधिक इतिहास और बदलता रूट
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुख्य आरोपी मुकेश लोनिया पहले भी अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा है। करीब दो साल पहले कोनी थाने में उसके खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था और उसे जेल भी भेजा जा चुका है। उसी दौरान उसकी पहचान उत्तर प्रदेश के तस्करों से हुई थी।
पूर्व में कुख्यात तस्कर सूच्चा सिंह और उसके गिरोह की गिरफ्तारी के बाद कटनी रूट से होने वाली नशीली दवाओं की सप्लाई लगभग ठप हो गई थी। हालांकि, डेढ़ साल बाद अब तस्करों ने कटनी का रास्ता बंद होने पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से नए रूट के जरिए खेप मंगाना शुरू कर दिया है। पुलिस का दावा है कि इस मामले में ‘एंड-टू-एंड’ (End-to-End) कार्रवाई की जाएगी, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े हर बड़े चेहरे को कानून के दायरे में लाया जा सके।









