Chhattisgarh Healthcare Controvery: मुंगेली के अवैध अस्पताल मामले में NHRC सख्त, कलेक्टर को दी कड़ी चेतावनी!

Chhattisgarh Healthcare Controvery: मुंगेली (लोरमी) के अवैध अस्पताल में हुई मौतों पर NHRC सख्त। जिला कलेक्टर को 2 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश, नहीं तो होगी बड़ी कार्रवाई। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
Chhattisgarh Healthcare Controvery: छत्तीसगढ़ के मुंगेली (Mungeli) जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लोरमी इलाके में बिना लाइसेंस और जरूरी सुविधाओं के चल रहे एक अवैध अस्पताल (Illegal Hospital) के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जिला प्रशासन की ढीली कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताते हुए आयोग ने मुंगेली कलेक्टर को दो हफ्ते के भीतर ‘Detailed Action Taken Report’ पेश करने का अल्टीमेटम दिया है।
क्या है पूरा मामला? (The Tragic Incident)
Chhattisgarh Healthcare Controvery:यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट आसिफ खान (Asif Khan) द्वारा उठाया गया था। शिकायत के अनुसार, लोरमी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में बिना पर्याप्त मेडिकल स्टाफ, उचित लाइसेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर के धड़ल्ले से इलाज और सर्जरी की जा रही थी। इस कथित मेडिकल लापरवाही (Medical Negligence) के कारण एक 7 साल की मासूम बच्ची और एक गर्भवती महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि यह अस्पताल स्वास्थ्य नियमों (Health Regulations) की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर अवैध रूप से ऑपरेट हो रहा था।
NHRC की चेतावनी: ‘पर्सनल अपीयरेंस’ के लिए रहें तैयार
Chhattisgarh Healthcare Controvery:मानवाधिकार आयोग ने इस दर्दनाक मामले का संज्ञान लेते हुए पिछले साल ही मुंगेली के जिला मजिस्ट्रेट-कम-कलेक्टरेट से जवाब मांगा था। लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई संतोषजनक रिपोर्ट जमा नहीं की गई।
मई 2026 में जारी अपने ताजा और कड़े आदेश में NHRC ने साफ कहा है:
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डेडलाइन: प्रशासन को हर हाल में 06 जून 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी।
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सख्त एक्शन: यदि तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट नहीं मिलती है, तो मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 13 (Section 13) के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से (Personal Appearance) तलब किया जाएगा।
Note: इस बार मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की कॉपी छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भी CC की गई है, ताकि टॉप-लेवल एडमिनिस्ट्रेशन की जवाबदेही तय की जा सके।
राइट टू हेल्थ पर सीधा हमला
Chhattisgarh Healthcare Controvery: ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स का कहना है कि बिना वैलिड अप्रूवल और क्वालिफाइड डॉक्टरों के अस्पतालों का संचालन सीधे तौर पर आम नागरिकों के ‘Right to Life and Health’ का उल्लंघन है। अब देखना यह होगा कि मुंगेली जिला प्रशासन इस समय सीमा के भीतर क्या एक्शन लेता है और आयोग को क्या रिपोर्ट सौंपता है।









