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बिलासपुर

पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए कहना क्रूरता, हाईकोर्ट ने दिया तलाक का आदेश

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि हिंदू संस्कृति में शादी के बाद पत्नी के कहने पर पति का माता-पिता से अलग होना सामान्य परंपरा नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बेटे का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता की देखभाल करे। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए पति को तलाक की मंजूरी दी। पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए कहना क्रूरता, हाईकोर्ट ने दिया तलाक का आदेश

क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के एक युवक की शादी 10 जून 2017 को छुईखदान की एक युवती से हुई थी। शादी के बाद पत्नी केवल ढाई महीने ही ससुराल में रही, फिर बिलासपुर में कोचिंग जॉइन करने की जिद करने लगी। जबकि शादी से पहले सहमति बनी थी कि वह गृहिणी के रूप में ससुराल में रहकर जिम्मेदारियां निभाएगी।

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सितंबर 2017 में वह पति या ससुरालवालों को बताए बिना बिलासपुर चली गई। काफी समझाने के बाद उसने पति को रायपुर में अलग रहने की शर्त रखी, जिस पर पति ने व्यवहार में सुधार की उम्मीद के साथ सहमति जताई। पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए कहना क्रूरता, हाईकोर्ट ने दिया तलाक का आदेश

पति पर लगाए झूठे आरोप, धमकी देकर किया परेशान

20 अगस्त 2018 को पत्नी ने पति को कॉल कर बताया कि वह रायपुर में ही रुकेगी, लेकिन जब पति ने पूछा कि कहां और किसके साथ?, तो उसने जवाब देने से इनकार कर दिया और मोबाइल बंद कर दिया। जब पति ने अपनी सास को सूचना दी, तो उसने धमकी दी कि अगर बेटी पर कोई प्रतिबंध लगाया तो झूठे आपराधिक मामले में फंसाकर जेल भिजवा देगी

इससे परेशान होकर पति और उसके परिवार ने 11 सितंबर 2018 को थाने में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन पत्नी काउंसलिंग के लिए नहीं पहुंची, बल्कि पति और ससुरालवालों के खिलाफ रायपुर में शिकायत दर्ज करा दी। पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए कहना क्रूरता, हाईकोर्ट ने दिया तलाक का आदेश

हाईकोर्ट का फैसला: पति को तलाक और 5 लाख गुजारा भत्ता

फैमिली कोर्ट में पहले पति ने वैवाहिक संबंधों की बहाली के लिए आवेदन दिया, लेकिन जब पत्नी का व्यवहार नहीं बदला तो पति ने तलाक की मांग की। पहले फैमिली कोर्ट ने पति के तलाक के आवेदन को खारिज कर दिया, लेकिन हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पति के पक्ष में फैसला सुनाया

हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी उचित कारण के पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता है। साथ ही, अदालत ने पति को पत्नी को 5 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया। पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए कहना क्रूरता, हाईकोर्ट ने दिया तलाक का आदेश

Nidar Chhattisgarh Desk

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