बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र, नाकेबंदी भी नहीं रोक पाई नौनिहालों का गुस्सा, जानिए पूरा मामला

बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र, नाकेबंदी भी नहीं रोक पाई नौनिहालों का गुस्सा, जानिए पूरा मामला
मुख्य बिंदु:
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बलौदाबाजार जिले में शिक्षक और सुविधाओं की कमी से छात्रों का सब्र टूटा, सड़क पर उतरे।
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सोनाखान एकलव्य विद्यालय के छात्रों को प्रशासन ने नाकेबंदी कर रोका, तो वे 5 किलोमीटर पैदल ही कलेक्टर से मिलने निकल पड़े।
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जिले में 1300 शिक्षकों के पद खाली, टुण्ड्रा और साहड़ा के छात्र भी कर चुके हैं प्रदर्शन।
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अभिभावकों ने दी चेतावनी- सालों से मिल रहे सिर्फ आश्वासन, समाधान नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन।
बलौदाबाजार : बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र, जब भविष्य की नींव यानी शिक्षा ही कमजोर पड़ने लगे, तो नौनिहालों को अपनी किताबों को छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ता है। कुछ ऐसा ही दर्दनाक और चिंताजनक दृश्य छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में देखने को मिल रहा है, जहां छात्र अपने हक के लिए प्रशासन के सामने डटकर खड़े हो गए हैं।
सबसे झकझोर देने वाली तस्वीर सोमवार को सामने आई, जब कसडोल विकासखंड के एकलव्य आवासीय विद्यालय, सोनाखान के छात्र अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर से मिलने के लिए निकले, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र
जब प्रशासन की नाकेबंदी भी हो गई फेल
एकलव्य विद्यालय के छात्र बिजली, पानी और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से तंग आकर एक बस में सवार होकर कलेक्टर कार्यालय के लिए निकले। जैसे ही यह खबर जिला प्रशासन को मिली, हड़कंप मच गया। कसडोल एसडीएम, पुलिस और आदिम जाति कल्याण विभाग की टीम ने नाकेबंदी कर छात्रों की बस को रोक लिया। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ।बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र
प्रशासन के रवैये से आक्रोशित बच्चे बस से उतरे और पैदल ही बलौदाबाजार की ओर कूच कर दिया। एक तरफ छात्र पैदल चल रहे थे और उनके पीछे-पीछे एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस की गाड़ियों का काफिला चल रहा था। लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलने के बाद बच्चे डोंगरीडीह गांव में रुके, लेकिन उनकी एक ही जिद थी- “बात करेंगे तो सिर्फ कलेक्टर से।” घंटों की जद्दोजहद के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और 4 छात्रों को कलेक्टर से मिलवाने ले जाया गया।बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र
यह अकेली घटना नहीं, पूरे जिले में प्रदर्शन
सोनाखान की घटना कोई अकेली नहीं है। यह पूरे जिले में शिक्षा व्यवस्था की लचर हालत का एक प्रतीक है।बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र
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टुण्ड्रा के छात्र: कसडोल के ही टुण्ड्रा स्कूल के छात्र शिक्षक की मांग को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पहुंच चुके हैं। उन्हें पहले कलेक्टर से आश्वासन मिला था, जो पूरा नहीं हुआ।
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साहड़ा के छात्र: पलारी ब्लॉक के साहड़ा स्कूल के छात्रों ने शिक्षकों की कमी और जर्जर सड़क से परेशान होकर गिधपुरी-पलारी मार्ग जाम कर दिया था।
जड़ में है 1300 शिक्षकों की कमी
इस पूरे छात्र आंदोलन की जड़ में है जिले में शिक्षकों की भारी कमी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में लगभग 1300 शिक्षकों के पद खाली हैं, जिनमें 600 से अधिक पद व्याख्याताओं के हैं। ऐसे में पढ़ाई कैसे हो, यह सबसे बड़ा सवाल है।बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र
टूटता सब्र, खोखले आश्वासन और उग्र आंदोलन की चेतावनी
छात्रों के अभिभावकों का दर्द भी छलक रहा है। पालक समिति के अध्यक्ष मनोहर सिंह ध्रुव ने कहा, “यह समस्या पिछले 3-4 सालों से है। हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, समाधान नहीं। अगर अब भी कुछ नहीं हुआ तो हम उग्र आंदोलन करेंगे।”बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र
प्रशासन की सफाई: कलेक्टर ने क्या कहा?
मामले पर कलेक्टर दीपक सोनी ने कहा कि सोनाखान एकलव्य विद्यालय में सबसे बड़ी समस्या बिजली की है। जंगल से लाइन गुजरने के कारण मौसम खराब होते ही बिजली गुल हो जाती है, जिससे पानी की भी समस्या होती है। विद्युत विभाग को स्थायी समाधान के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उन्होंने चार साल पुराने मार्कशीट की त्रुटि का भी जिक्र किया, जिसे सुधार के लिए भेजा गया है।बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र
हालांकि, छात्रों का संघर्ष यह दिखाता है कि प्रशासनिक आश्वासन अब उनके लिए नाकाफी हैं और वे अपनी पढ़ाई के लिए कोई भी ठोस कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।बलौदाबाजार में शिक्षा का संकट: 5 KM पैदल चले छात्र









