नक्सलवाद का अंत करीब: टॉप माओवादी लीडर गणपति के जीवित होने की पुष्टि, पुलिस ने की सरेंडर की अपील

नक्सलवाद का अंत करीब: टॉप भारत में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) शिवधर रेड्डी ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए पुष्टि की है कि शीर्ष नक्सली नेता गणपति अभी भी जीवित है। पुलिस की विशेष टीमें उसकी वर्तमान लोकेशन का पता लगाने और उसे मुख्यधारा में वापस लाने के लिए सक्रिय हो गई हैं।
गणपति जीवित है, लेकिन संगठन की कमान बदली
नक्सलवाद का अंत करीब: टॉपडीजीपी शिवधर रेड्डी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि गणपति (Ganapathy) अब संगठन के प्रमुख पद पर नहीं है, लेकिन उसकी मौजूदगी रणनीतिक रूप से अभी भी माओवादी कैडरों के लिए महत्वपूर्ण है। खुफिया विभाग की विशेष शाखा ‘SIB’ और एंटी-नक्सल यूनिट ‘ग्रेहाउंड्स’ लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। पुलिस का मुख्य उद्देश्य उसे गिरफ्तार करना या आत्मसमर्पण (Surrender) के लिए प्रेरित करना है।
तेलंगाना में नक्सलवाद के खात्मे का मिशन
डीजीपी के अनुसार, तेलंगाना अब लगभग पूरी तरह से नक्सल मुक्त होने की कगार पर है। उन्होंने भूमिगत नक्सलियों से अपील की है कि अब छिपकर रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, “देश अब माओवाद से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही एकमात्र सही विकल्प है।”
आंकड़ों में बड़ी सफलता: 761 माओवादियों का आत्मसमर्पण
नक्सलवाद का अंत करीब: टॉपपिछले कुछ वर्षों में तेलंगाना पुलिस की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के कारण माओवादियों के आत्मसमर्पण की दर में भारी इजाफा हुआ है।
पिछले दो वर्षों में कुल 761 माओवादियों ने हथियार डाले हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा बलों की ‘ग्रेहाउंड्स’ और ‘SIB’ इकाइयों ने इन नक्सलियों को मुख्यधारा में शामिल करने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
रडार पर अब भी बचे हैं ये 5 बड़े नक्सली नेता
पुलिस ने उन प्रमुख माओवादी चेहरों की पहचान की है जो अभी भी भूमिगत हैं और पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में शामिल हैं:
गणपति (केंद्रीय समिति सदस्य)
पसनुरी नरहरी (केंद्रीय समिति सदस्य)
जाड़े रत्ना बाई (एरिया कमेटी मेंबर – ACM)
वार्ता शेखर (ACM)
रंगबोइना भाग्या
पुनर्वास नीति: नई शुरुआत का मौका
नक्सलवाद का अंत करीब: टॉपतेलंगाना सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए एक आकर्षक पुनर्वास नीति तैयार की है। इसके तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाती हैं:
तत्काल आर्थिक सहायता और जीवन यापन के साधन।
रहने के लिए आवास और बुनियादी सुविधाएं।
मुख्यधारा के समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए कानूनी मदद।
तेलंगाना पुलिस का यह खुलासा और ग्रेहाउंड्स की सक्रियता दर्शाती है कि नक्सलवाद का अंतिम दौर शुरू हो चुका है। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता अब शेष बचे नेताओं को कानून के दायरे में लाना और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना है।



















