छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी, हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई

WHO के मानकों से छत्तीसगढ़ क्यों है पीछे?
बिलासपुर। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार, हर 10,000 लोगों पर एक मनोरोग विशेषज्ञ होना आवश्यक है। लेकिन छत्तीसगढ़ में हालात चिंताजनक हैं। यहां 8 लाख लोगों के लिए मात्र एक मनोरोग विशेषज्ञ उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी, हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई
हाई कोर्ट में दायर हुई याचिका
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में मानसिक रोगियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर दो जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई चल रही है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी, हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई
सेंदरी मानसिक चिकित्सालय की दुर्दशा
राज्य का एकमात्र मानसिक चिकित्सालय, जो बिलासपुर के सेंदरी में स्थित है, की स्थिति भी दयनीय है। यहां आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कमी से मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी, हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई
हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मानसिक चिकित्सालय सेंदरी में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है। छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी, हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ती चिंता
राज्य में मानसिक रोगियों के लिए सुविधाओं का अभाव न केवल WHO के मानकों से विपरीत है, बल्कि यह समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग को आवश्यक सेवाएं प्रदान करने में भी विफलता दर्शाता है। छत्तीसगढ़ में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी, हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई



















