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बिलासपुर

फिल स्टील प्लांट में जोरदार धमाका, क्रेन ऑपरेटर गंभीर रूप से झुलसा; प्रबंधन और पुलिस की भूमिका संदिग्ध

फिल स्टील प्लांट में जोरदार धमाका, न्यायधानी के औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक बार फिर भारी पड़ी है। बिलासपुर के घुटकू-निरतू स्थित ‘फिल स्टील एंड पावर प्लांट’ (Phil Steel and Power Plant) में शनिवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। प्लांट के भीतर वाटर कंटेनर फटने से एक क्रेन ऑपरेटर बुरी तरह झुलस गया है। इस घटना के बाद से ही प्लांट प्रबंधन और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

हादसे के बाद दहशत: वाटर कंटेनर फटने से मची अफरा-तफरी

जानकारी के अनुसार, शनिवार को जब प्लांट में काम चल रहा था, तभी अचानक एक वाटर कंटेनर जोरदार धमाके के साथ फट गया। इस ब्लास्ट की चपेट में आने से ड्यूटी पर तैनात क्रेन ऑपरेटर आशुतोष कुमार (26 वर्ष) बुरी तरह झुलस गया। आनन-फानन में घायल को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। घायल आशुतोष मूल रूप से बिहार का निवासी बताया जा रहा है।

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प्रबंधन का ‘लीपापोती’ अभियान: गंभीर चोट को बताया सामान्य घटना

फिल स्टील प्लांट में जोरदार धमाका,हादसे के तुरंत बाद फिल स्टील प्लांट प्रबंधन मामले को दबाने की कोशिशों में जुट गया। अपनी साख बचाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए प्रबंधन ने एक अधिकारिक बयान जारी कर दावा किया कि प्लांट में कोई बड़ा विस्फोट या बॉयलर फटने जैसी घटना नहीं हुई है। प्रबंधन का कहना है कि यह एक सामान्य तकनीकी खराबी थी और कर्मचारी को मामूली चोटें आई हैं। हालांकि, घायल की अस्पताल में हालत प्रबंधन के दावों की पोल खोल रही है।

कोनी पुलिस की संदिग्ध चुप्पी: घंटों बाद टूटी नींद

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला पहलू कोनी थाना पुलिस का रवैया रहा। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने और इलाके में चर्चा फैलने के बावजूद, पुलिस घंटों तक घटना से अनभिज्ञ होने का दिखावा करती रही। आरोप लग रहे हैं कि पुलिस और प्लांट प्रबंधन के बीच मामले को ठंडे बस्ते में डालने की ‘सेटिंग’ चल रही थी। घटनास्थल पर समय पर न पहुँचकर पुलिस ने प्रबंधन को साक्ष्य मिटाने का पर्याप्त समय दे दिया।

कानूनी विशेषज्ञों की राय: पुलिस की देरी भी एक अपराध

कानून के जानकारों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक दुर्घटना की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करना पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्यस्थल पर लापरवाही के मामलों में तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए। पुलिस का देरी से पहुँचना न केवल कर्तव्य में लापरवाही (Dereliction of Duty) है, बल्कि यह धारा 238 (साक्ष्य छिपाना) के तहत भी जांच का विषय हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, मेडिको-लीगल केस (MLC) में पुलिस को बिना किसी विलंब के हस्तक्षेप करना अनिवार्य है।

उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई शुरू

फिल स्टील प्लांट में जोरदार धमाका,जब मामला स्थानीय मीडिया में सुर्खियां बनने लगा और दबाव बढ़ा, तब जाकर पुलिस के आला अधिकारी हरकत में आए। कोनी सीएसपी (CSP) गगन कुमार ने आखिरकार हादसे की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि निरतू स्थित स्पंज आयरन प्लांट में वाटर कंटेनर फटने की घटना हुई है, जिसमें बिहार निवासी एक कर्मचारी घायल हुआ है। पुलिस अब मामले की विस्तृत जांच करने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के पहलुओं को खंगालने की बात कह रही है।

फिल स्टील प्लांट में जोरदार धमाका, यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों की सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़ा करता है। देखना यह होगा कि क्या दोषी प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई होती है या मामला रसूख के नीचे दबकर रह जाता है।

Pooja Chandrakar

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