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गरियाबंद

राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला, किसान सिंचाई को तरस रहे

राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला, किसान सिंचाई को तरस रहे, गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में किसानों को इस बार सिंचाई के लिए गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते नहरें झाड़ियों और घास-फूस से अटी पड़ी हैं, जिससे पानी का बहाव अवरुद्ध हो गया है। मरम्मत और साफ-सफाई के लिए आवंटित लाखों रुपये कथित तौर पर कागजों पर ही खर्च हो रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

नहरों का बुरा हाल, पानी की किल्लत
राजिम क्षेत्र की नहरें पूरी तरह से घास और झाड़ियों से ढकी हुई हैं, जिससे पानी की गति धीमी हो गई है। कई स्थानों पर नहरों के किनारे के रास्ते भी इतने खराब हो चुके हैं कि किसानों का आवागमन मुश्किल हो गया है। संवाददाता द्वारा की गई पड़ताल में यह साफ हुआ कि विभाग द्वारा कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है, बल्कि मरम्मत के नाम पर मिलने वाले फंड का बंदरबांट कर लिया गया है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

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लाखों के फंड का दुरुपयोग
हर साल सिंचाई विभाग को नहरों के रखरखाव और मरम्मत के लिए लाखों रुपये मिलते हैं, लेकिन इन फंड का उपयोग काम में न होकर व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जा रहा है। कई छोटी नहरों में लाइनिंग का काम भी अधूरा है, जिससे दूर-दराज के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

किसानों में गहरा आक्रोश
राजिम, पीपरछेड़ी, बेलटुकरी, भैंसातरा, कौदकेरा, देवरी, जेंजरा जैसे कई गांवों के किसान इस स्थिति से बेहद नाराज हैं। जेंजरा के किसानों, राजेंद्र साहू, सोमनाथ साहू और भुवन साहू ने बताया कि सिंचाई विभाग सालों से नहरों की सफाई पर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे टेल एरिया तक पानी नहीं पहुंच पाता। किसान यह सवाल उठा रहे हैं कि साफ-सफाई के लिए स्वीकृत राशि आखिर जाती कहाँ है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही
इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए राजिम सब डिवीजन के एसडीओ से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उनके घर से बताया गया कि वे बाजार गए हुए हैं। जिले के अन्य अधिकारी भी अक्सर फोन उठाने या जानकारी देने से बचते हैं, जिससे आम जनता को सही जानकारी नहीं मिल पाती है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

राजिम सब डिवीजन की बदहाली
गरियाबंद जिले का राजिम क्षेत्र धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी सिंचाई सिकासार जलाशय और कुकदा पैरी पिकअप वियर से होती है। बाई और दाई कैनाल से लाखों हेक्टेयर जमीन सींची जाती है। हालांकि, दाई कैनाल से निकलने वाली छोटी नहरों की हालत बेहद खराब है। 12-15 साल पहले करोड़ों रुपये की लागत से किया गया स्लीपर का काम भी कई जगहों पर अधूरा पड़ा है। फिंगेश्वर सब डिवीजन में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया था, जब सूचना के अधिकार के तहत एक किसान ने लाखों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इससे राजिम क्षेत्र के किसान भी अब सचेत हो गए हैं।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

एसडीओ का चौंकाने वाला बयान: “इस साल मरम्मत के लिए कोई पैसा नहीं आया”
राजिम सब डिवीजन के एसडीओ से संपर्क करने पर उन्होंने अगले दिन सुबह फोन करके बताया कि “इस साल तो कोई पैसा आया ही नहीं।” यह बयान विभाग द्वारा हर साल लाखों रुपये आवंटित किए जाने के दावों पर सवाल खड़ा करता है और किसानों के गुस्से को और बढ़ा सकता है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में किसानों को इस बार सिंचाई के लिए गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते नहरें झाड़ियों और घास-फूस से अटी पड़ी हैं, जिससे पानी का बहाव अवरुद्ध हो गया है। मरम्मत और साफ-सफाई के लिए आवंटित लाखों रुपये कथित तौर पर कागजों पर ही खर्च हो रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

नहरों का बुरा हाल, पानी की किल्लत
राजिम क्षेत्र की नहरें पूरी तरह से घास और झाड़ियों से ढकी हुई हैं, जिससे पानी की गति धीमी हो गई है। कई स्थानों पर नहरों के किनारे के रास्ते भी इतने खराब हो चुके हैं कि किसानों का आवागमन मुश्किल हो गया है। संवाददाता द्वारा की गई पड़ताल में यह साफ हुआ कि विभाग द्वारा कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है, बल्कि मरम्मत के नाम पर मिलने वाले फंड का बंदरबांट कर लिया गया है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

लाखों के फंड का दुरुपयोग
हर साल सिंचाई विभाग को नहरों के रखरखाव और मरम्मत के लिए लाखों रुपये मिलते हैं, लेकिन इन फंड का उपयोग काम में न होकर व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जा रहा है। कई छोटी नहरों में लाइनिंग का काम भी अधूरा है, जिससे दूर-दराज के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

किसानों में गहरा आक्रोश
राजिम, पीपरछेड़ी, बेलटुकरी, भैंसातरा, कौदकेरा, देवरी, जेंजरा जैसे कई गांवों के किसान इस स्थिति से बेहद नाराज हैं। जेंजरा के किसानों, राजेंद्र साहू, सोमनाथ साहू और भुवन साहू ने बताया कि सिंचाई विभाग सालों से नहरों की सफाई पर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे टेल एरिया तक पानी नहीं पहुंच पाता। किसान यह सवाल उठा रहे हैं कि साफ-सफाई के लिए स्वीकृत राशि आखिर जाती कहाँ है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

अधिकारियों की चुप्पी और लापरवाही
इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए राजिम सब डिवीजन के एसडीओ से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। उनके घर से बताया गया कि वे बाजार गए हुए हैं। जिले के अन्य अधिकारी भी अक्सर फोन उठाने या जानकारी देने से बचते हैं, जिससे आम जनता को सही जानकारी नहीं मिल पाती है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

राजिम सब डिवीजन की बदहाली
गरियाबंद जिले का राजिम क्षेत्र धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी सिंचाई सिकासार जलाशय और कुकदा पैरी पिकअप वियर से होती है। बाई और दाई कैनाल से लाखों हेक्टेयर जमीन सींची जाती है। हालांकि, दाई कैनाल से निकलने वाली छोटी नहरों की हालत बेहद खराब है। 12-15 साल पहले करोड़ों रुपये की लागत से किया गया स्लीपर का काम भी कई जगहों पर अधूरा पड़ा है। फिंगेश्वर सब डिवीजन में भी इसी तरह का एक मामला सामने आया था, जब सूचना के अधिकार के तहत एक किसान ने लाखों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इससे राजिम क्षेत्र के किसान भी अब सचेत हो गए हैं।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

एसडीओ का चौंकाने वाला बयान: “इस साल मरम्मत के लिए कोई पैसा नहीं आया”
राजिम सब डिवीजन के एसडीओ से संपर्क करने पर उन्होंने अगले दिन सुबह फोन करके बताया कि “इस साल तो कोई पैसा आया ही नहीं।” यह बयान विभाग द्वारा हर साल लाखों रुपये आवंटित किए जाने के दावों पर सवाल खड़ा करता है और किसानों के गुस्से को और बढ़ा सकता है।राजिम की नहरें बेहाल: सफाई के नाम पर लाखों का घोटाला

Pooja Chandrakar

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