मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी जारी, फीस और किताबों की जानकारी अब तक नहीं हुई सार्वजनिक

मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी जारी, फीस और किताबों की जानकारी अब तक नहीं हुई सार्वजनिक
भोपाल: मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी का सिलसिला जारी है। सरकार द्वारा फीस, पुस्तकों और अन्य शुल्कों की जानकारी सार्वजनिक करने के आदेश के बावजूद अब तक अधिकांश स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया है। इससे अभिभावकों में नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी जारी
शासन के आदेशों की हो रही अनदेखी
? नए शिक्षण सत्र को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 30 जनवरी तक स्कूलों को शुल्क संरचना, किताबों और अन्य खर्चों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे।
? स्कूलों को अपनी वेबसाइट और सूचना पटल पर किताबों के प्रकाशक, लेखक और कीमत सहित पूरी सूची प्रदर्शित करनी थी।
? इसके साथ ही, सभी निजी स्कूलों को हार्ड कॉपी में यह जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भी जमा करनी थी।
? लेकिन, अधिकांश स्कूलों ने इस आदेश का पालन नहीं किया है, जिससे अभिभावकों को नए सत्र में बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
पालक महासंघ ने जताई नाराजगी
???? पालक महासंघ के महासचिव प्रबोध पंड्या ने कहा कि पूरे प्रदेश में लगभग 34,662 निजी स्कूल हैं, लेकिन अब तक केवल 400 स्कूलों ने फीस की जानकारी दी है, वह भी अधूरी।
???? राजधानी भोपाल सहित कई शहरों में अधिकारी आदेशों को लागू कराने में विफल साबित हो रहे हैं।
???? बार-बार शिकायतों और पत्राचार के बावजूद शासन-प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
एजुकेशन पोर्टल भी नहीं हो पाया अपडेट
? स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित एजुकेशन पोर्टल भी अधूरी जानकारी से भरा पड़ा है।
? अभिभावकों को पोर्टल से सही जानकारी नहीं मिल पा रही, जिससे वे असमंजस में हैं।
? स्कूलों की मनमानी और शासन की उदासीनता की वजह से अभिभावकों को पढ़ाई, फीस और किताबों से जुड़ी अहम जानकारियां नहीं मिल पा रही हैं।
शासन की सख्ती कब?
⚠ स्कूलों की मनमानी और प्रशासन की लापरवाही के कारण हर साल अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
⚠ सरकार ने स्कूलों पर कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
⚠ यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं निकला, तो अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी के आगे फिर से झुकना पड़ेगा।
? क्या शासन अब स्कूलों पर कार्रवाई करेगा, या फिर अभिभावकों को इसी तरह परेशान होना पड़ेगा? यह देखने वाली बात होगी।



















