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Jal Jeevan Mission Failure: ₹1.59 करोड़ खर्च के बाद भी प्यासा है सुंदरपुर, महिलाएं गंदा पानी पीने को मजबूर!

छत्तीसगढ़ के सुंदरपुर में ₹1.59 करोड़ खर्च होने के बाद भी जल जीवन मिशन फेल। गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Water Crisis in Korea, Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जहाँ सरकार ‘हर घर जल’ का दावा कर रही है, वहीं सोनहत ब्लॉक के ग्राम पंचायत सुंदरपुर में Jal Jeevan Mission का बुरा हाल है। ₹1.59 करोड़ के 5 प्रोजेक्ट्स पूरे होने के बावजूद ग्रामीणों को भीषण गर्मी में एक-एक बूंद पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

1km पैदल चलकर ‘ढोढ़ी’ का गंदा पानी लाने की मजबूरी

"Women collecting dirty water from Dhodhi in Sundarpur village, Korea district."

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सुंदरपुर में Water Crisis इतनी गंभीर हो गई है कि गांव की महिलाएं करीब 1 किलोमीटर दूर जाकर ‘ढोढ़ी’ (कच्चा कुआं) से पानी लाने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि यह पानी न तो साफ है और न ही पीने लायक। गंदा और बदबूदार पानी पीने की वजह से गांव में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

Jal Jeevan Mission: कागजों पर काम, धरातल पर सूखा

PHE विभाग (Public Health Engineering Department) के उदासीन रवैये ने ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ा दी है।

  • 4 साल पहले नल लगे: गांव के घरों में 4 साल पहले पाइपलाइन बिछा दी गई और नल लगा दिए गए।

  • सोलर टंकियां स्थापित: सोलर पंप और टंकियां भी लगाई गईं।

  • हकीकत: आज तक इन नलों से पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है।

PHE Records vs Ground Reality: क्या कहते हैं आंकड़े?

PHE विभाग के दस्तावेजों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार:

सुविधा (Facilities) विभाग का रिकॉर्ड (PHE Records) वर्तमान स्थिति (Current Status)
कुल हैंडपंप 28 सिर्फ 4 खराब (दावा), बाकी से भी पानी नहीं
सोलर पंप 4 ग्रामीण उपयोग नहीं कर पा रहे
नल कनेक्शन 296 घरों में एक भी नल में पानी नहीं आ रहा
कुल आबादी 1618 पीने के पानी के लिए ‘ढोढ़ी’ पर निर्भर

ग्रामीणों का छलका दर्द: “बीमार हो रहे हैं बच्चे”

गांव की महिलाओं और पुरुषों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय निवासियों ने अपनी व्यथा कुछ इस तरह साझा की:

  • मानमती: “हमें मजबूरी में गंदा पानी पीना पड़ रहा है, जिससे घर में लोग बीमार हो रहे हैं।”

  • सीमा सिंह: “भीषण गर्मी में ढोढ़ी का पानी भी सूखने लगता है, तब स्थिति और डरावनी हो जाती है।”

  • फलेंद्र सिंह: “खुले कुओं और ढोढ़ी के पास कोई सुरक्षा घेरा नहीं है। छोटे बच्चे वहां नहाते हैं, जिससे हर वक्त हादसे का डर बना रहता है।”

करोड़ों का बजट, फिर भी प्यास बाकी (Project Details)

सुंदरपुर और आस-पास के क्षेत्रों के लिए मंजूर किए गए प्रोजेक्ट्स की लागत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे:

  1. मल्टीविलेज योजना: ₹32.68 करोड़

  2. रेट्रोफिटिंग विलेज: ₹42.53 लाख

  3. सोलर योजना (डूमरिया): ₹49.47 लाख

  4. सोलर योजना (हरिजनपारा): ₹24.46 लाख

  5. पीडब्ल्यूएसएस योजना: ₹67.28 लाख

Conclusion: करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी अगर आदिवासी अंचलों में महिलाओं को गंदा पानी पीना पड़ रहा है, तो यह सिस्टम की बड़ी नाकामी है। Chhattisgarh Government और कलेक्टर को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेकर PHE विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।

Dr. Tarachand Chandrakar

Editor-in-Chief

डॉ. ताराचंद चंद्राकर एक प्रखर विचारक और अनुभवी पत्रकार हैं, जो 'निडर छत्तीसगढ़' के माध्यम से निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता को नई दिशा दे रहे हैं। तथ्यों की शुद्धता और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें डिजिटल पत्रकारिता में एक विश्वसनीय नाम बनाया है।

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